किसानों को उत्पाद का नहीं मिल रहा उचित मूल्य : कुलपति बीएयू
भागलपुर, 19 मार्च (हि.स.)। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में खेती को लेकर लगातार नवाचार और तकनीकी प्रगति तो हुई है, लेकिन इन उपलब्धियों का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह कृषि उत्पादों के लिए मजबूत बाजार व्यवस्था का अभाव माना जा रहा है। भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए गुरुवार को कहा कि कृषि वैज्ञानिकों का काम नए-नए अनुसंधान करना है और इस दिशा में बीएयू ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कई नई फसलें, तकनीक और उत्पाद विकसित किए गए हैं। यहां तक कि कई का पेटेंट भी हुआ है, लेकिन जब इनका उत्पादन बढ़ता है, तो किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।
उन्होंने बताया कि किसान अक्सर यह सवाल करते हैं कि जब उत्पादन बंपर हुआ है, तो बाजार में सही कीमत क्यों नहीं मिल रही। यह स्थिति किसानों के उत्साह को भी प्रभावित करती है और कृषि विकास की गति को धीमा कर देती है। डॉ. सिंह ने हाल ही में भागलपुर में आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेला के दौरान बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव से भी इस मुद्दे पर चर्चा की।
उन्होंने आग्रह किया कि बीज से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में सरकार और कृषि वैज्ञानिकों के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है। साथ ही उद्योग विभाग और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच तालमेल बनाकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्य में छोटे-छोटे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, जो कुटीर और सामुदायिक स्तर पर संचालित हो सकें। इससे न केवल किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
डॉ. सिंह के अनुसार, बिहार सरकार के कृषि रोडमैप में लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। इस राशि का एक हिस्सा कृषि आधारित लघु उद्योगों और वैल्यू एडिशन पर भी खर्च किया जाना चाहिए। इससे कृषि उत्पादों को सीधे बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में कृषि उत्पादों के साथ वैल्यू एडिशन जोड़ना समय की मांग है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर