भागलपुर में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज, बरारी में दिखेगी 70 फीट ऊंची 'कृष्ण लीला'
भागलपुर, 24 सितंबर (हि.स.)। जिले में शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं।
इस वर्ष बरारी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित 'वैष्णवी दरबार दुर्गा पूजा समिति' की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण तैयार किया जा रहा है।
समिति इस बार भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं पर आधारित करीब 70 फीट ऊंचा भव्य पंडाल बनवा रही है। इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण के माध्यम से समाज में सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की जा रही है।
पंडाल को अंतिम रूप देने के लिए पश्चिम बंगाल के मालदा से मुस्लिम समुदाय के पांच कुशल कारीगरों की टीम भागलपुर पहुंची है। पंडाल के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर उनके युवावस्था तक के विभिन्न प्रसंगों और लीलाओं को 3-डी कलाकृतियों के जरिए जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। पंडाल के मुख्य हिस्से के सामने भगवान श्रीकृष्ण की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी, जबकि उसके ठीक ऊपर घूमता हुआ सुदर्शन चक्र श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। कारीगरों ने करीब 10 से 15 दिन पहले ही इस विशाल संरचना का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है और आगामी 4 अक्टूबर तक मुख्य काम को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
गंगा-जमुनी तहजीब को बयां करते हुए मुख्य कारीगर अफजल ने कहा, हमारे त्योहार भले ही अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन समाज में हम सभी को मिल-जुलकर और एक-दूसरे के साथ रहना चाहिए। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में बढ़-चढ़कर साथ निभाएं, यही सच्चे भाईचारे की पहचान है। हम पूरी श्रद्धा के साथ इस पंडाल को तराश रहे हैं। वहीं, निर्माण टीम के सदस्य और कारीगर मोहम्मद तौफीक ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, कला का कोई धर्म नहीं होता। मां दुर्गा के इस पावन दरबार में श्रीकृष्ण की लीलाओं को आकार देना हमारे लिए गर्व की बात है। जब लोग इस पंडाल की खूबसूरती और कला को देखेंगे, तो उन्हें इसमें हमारे हाथों की मेहनत के साथ-साथ आपसी मोहब्बत का पैगाम भी नजर आएगा।
समिति के मेढ़पति गजेंद्र सिंह ने बताया कि बरारी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में वर्ष 1988 से निरंतर दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, इस बार हमने 'कृष्ण लीला' की विशेष थीम रखी है। हमारा उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक आकर्षण के साथ-साथ समाज को एकता और सामाजिक सौहार्द का एक मजबूत संदेश देना है। मालदा से आए कारीगर दिन-रात मेहनत करके इस भव्य पंडाल को आकार दे रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर