चार साल के इंतजार के बाद पूरा हुआ परिवार, डीएम ने बच्ची इशिका को दत्तक ग्रहण पूर्व पोषण देखरेख के लिए सौंपा
सुपौल, 05 सितंबर (हि.स.)। जिले में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया के तहत शनिवार को एक बालिका को पश्चिम बंगाल की एकल माता को दत्तक ग्रहण पूर्व पोषण देखरेख के लिए अस्थायी रूप से सौंपा गया।
जिलाधिकारी सावन कुमार ने दत्तक ग्रहण समिति, सुपौल की अनुशंसा के आधार पर दत्तक ग्रहण विनियम के प्रावधानों के तहत बालिका इशिका को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी एकल माता सुश्री राखी पुरकायस्थ को विधिवत सुपुर्द किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने भावी माता को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को परिवार का स्नेह और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराया जा सकता है।
बच्ची को दत्तक ग्रहण पूर्व पोषण देखरेख के लिए सौंपे जाने के बाद सुश्री राखी पुरकायस्थ ने अत्यंत हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि करीब चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आज उनका परिवार पूर्ण हुआ है। बच्ची के उनके जीवन में आने पर उन्होंने खुशी जताते हुए इसे अपने लिए बेहद भावुक और यादगार क्षण बताया। बच्चों का दत्तक ग्रहण यानी गोद लेना एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत जैविक माता-पिता से स्थायी रूप से अलग हो चुके बच्चे को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दत्तक माता-पिता की वैध संतान का दर्जा मिलता है।
दत्तक ग्रहण के बाद बच्चे को नए परिवार में माता-पिता का स्नेह, संरक्षण और अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं। दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के माध्यम से पूरी की जाती है। इच्छुक दत्तक माता-पिता को मिशन वात्सल्य के वेब पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया, पात्रता और संबंधित समिति की अनुशंसा के आधार पर दत्तक ग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।
सुपौल में हुई इस कार्रवाई से एक ओर जहां बच्ची को परिवार का स्नेह और बेहतर भविष्य मिलने की राह बनी है, वहीं दूसरी ओर चार वर्षों से संतान की प्रतीक्षा कर रही एकल माता का परिवार भी पूरा हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र