मदीना मुनव्वरा में रौज़ा-ए-अक़दस के सामने सलातो-सलाम पेश करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य: सैयद शाह फकरे आलम हसन

 




भागलपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। भागलपुर स्थित ऐतिहासिक ख़ानक़ाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादा नशीन सैयद शाह फख़्र-ए-आलम हसन ने मदीना-ए-रसूल में हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ाﷺ के रौज़ा-ए-अक़दस की मुबारक जाली (मुवाजहा शरीफ़) के सामने सलातो-सलाम पेश किया।

इस पावन अवसर पर उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे मुबारक, रूहानी और सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। इस पवित्र यात्रा में उनके साथ साहबज़ादे सैयद साद अल-हुसैनी और उस्मान अली शरफ़ शाह भी मौजूद रहे।

पवित्र भूमि से पूरी दुनिया के लिए शांति का संदेश देते हुए सज्जादा नशीन ने कहा कि अल्लाह के अंतिम पैग़म्बर ने इसी मुक़द्दस सरज़मीन से पूरी इंसानियत को तौहीद, प्रेम, दया, न्याय और भाईचारे की शिक्षा दी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में नफ़रत, तनाव और दूरियां बढ़ रही हैं, ऐसे समय में पैग़म्बर मोहम्मद के अमन, शांति और हुस्न-ए-अख़लाक़ (उत्तम चरित्र) के संदेश को आम करने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

सज्जादा नशीन ने कहा कि इंसानी जीवन का कोई भी क्षेत्र हो, यदि व्यक्ति नबी की शिक्षाओं और सीरत-ए-मुबारका पर अमल करता है, तो उसका जीवन करुणा और मानवता से भर जाएगा। उन्होंने कहा, हमें जो कुछ भी मिला, इसी निस्बत-ए-मुस्तफ़ा से मिला। नबी के अख़लाक़ ने ही कठिन से कठिन विरोध के बावजूद लोगों के दिलों को जीता। यात्रा के अंत में उन्होंने बारगाह-ए-इलाही में पूरी इंसानियत के लिए भलाई, आपसी मोहब्बत, अमन-चैन और मानवता की सेवा के लिए विशेष दुआ की।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर