बीएयू में 67 एकड़ में रोपित धान की फसल पूरी तरह जलमग्न

 


भागलपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के बीएसी फार्म में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर के कारण लगभग 67 एकड़ में रोपित धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। प्रभावित क्षेत्र में राइस एरिया के साथ-साथ एल-ब्लॉक, एम-ब्लॉक, एन-ब्लॉक, के-ब्लॉक एवं जे-ब्लॉक शामिल हैं। इन प्रक्षेत्रों में धान की 17 विभिन्न किस्मों का रोपण किया गया था। कुल 67 एकड़ रोपित क्षेत्र में से लगभग 47.85 एकड़ क्षेत्र में ब्रीडर बीज उत्पादन के उद्देश्य से धान की फसल लगाई गई थी। बाढ़ के पानी के कारण यह महत्वपूर्ण बीज उत्पादन कार्यक्रम भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय का लगभग 10 एकड़ क्षेत्रफल वाला मॉडल भिट्ठी फार्म भी बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गया है। इस गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी निदेशकों एवं संबंधित वैज्ञानिकों और पदाधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित प्रक्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जलभराव की स्थिति, धान की फसल पर संभावित प्रभाव तथा भविष्य में ऐसी समस्या से बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। कुलपति महोदय ने भविष्य में बाढ़ से होने वाली फसल क्षति को कम करने के लिए धान की वर्तमान किस्मों की समीक्षा कर बाढ़ की परिस्थिति के अनुकूल किस्मों के चयन एवं आवश्यकतानुसार किस्मों में बदलाव करने का सुझाव दिया। साथ ही, गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने की संभावित अवधि को ध्यान में रखते हुए धान की नर्सरी एवं रोपाई का कार्य पहले पूरा करने की संभावनाओं पर वैज्ञानिक रूप से कार्य करने को कहा, ताकि बाढ़ आने से पूर्व फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित अवस्था में पहुंच सके। निरीक्षण के दौरान फार्म में लंबे समय तक पानी जमा रहने की समस्या पर विशेष चिंता व्यक्त की गई। कुलपति ने फार्म क्षेत्र से बाढ़ के पानी की त्वरित निकासी तथा गंगा नदी के बाढ़ के पानी के अनियंत्रित प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए एक विस्तृत तकनीकी प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया। कुलपति ने संबंधित वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को वर्तमान बाढ़ से प्रभावित फसल एवं ब्रीडर बीज उत्पादन कार्यक्रम की स्थिति का समुचित आकलन करने तथा भविष्य के लिए तात्कालिक एवं दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर