लोकतंत्र और प्रतिरोध का भविष्य विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

 


भागलपुर, 18 मार्च (हि.स.)। छात्र आंदोलन दिवस के अवसर पर गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के सभा भवन में बुधवार को वर्तमान लोकतंत्र और प्रतिरोध का भविष्य विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रोफेसर डॉक्टर मनोज कुमार तथा संचालन डॉक्टर सुनील अग्रवाल ने किया। सर्वप्रथम डॉक्टर मनोज मीता ने विषय प्रवेश कराते हुए सभी का स्वागत किया।

इस अवसर पर डॉक्टर अवधेश जायसवाल पूर्व प्राचार्य और प्रोफेसर संजय जयसवाल मुख्य वक्ता थे। अवधेश जायसवाल ने कहा कि राजतंत्र का कवच स्वरूप प्रजातंत्र का उदय हुआ है पूंजीवाद है साम्राज्यवाद को जन्म देता है। वर्तमान साम्राज्यवाद अप्रत्यक्ष रूप में सामने आया है। वर्तमान में साम्राज्य वाद दूसरे रास्ते से आ रहा है। वैश्विक शक्तियां सरकारों को नियंत्रित कर रही है। प्रजातंत्र बूढ़ा हो रहा है। इसे संरक्षण की जरूरत है। आज छिटफुट आंदोलन हो रहे हैं। विश्वव्यापी व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन लोकतंत्र को नई शक्ति दे सकता है। सामूहिक चिंतन के आधार पर सामूहिक नेतृत्व के कोई अभिक्रम शुरू करने पड़ेंगे।

प्रोफेसर संजय जायसवाल ने कहा कि हम उन लोगों के सामने बोल रहे हैं, जिन्होंने इतिहास गढ़ा है। हम तो 74 आंदोलन के इस इतिहास को पढ़ रहे हैं। इसके निर्माण में आपकी भागीदारी रही है। विस्तार से इन्होंने आपातकाल के संदर्भ और वर्तमान स्थितियों का विश्लेषण किया और कहा कि प्रतिपक्ष लोकतंत्र के धारदार बनाने के लिए मजबूत होना चाहिए। लोकतांत्रिक संस्थाओं का लोकतंत्रीकरण अनिवार्य है।

उदय जी ने कहा लोकतंत्र केवल सरकार बनाने और चलने की प्रक्रिया नहीं है। लोकतंत्र एक भावना है। जिसमें आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके ऐसी एक प्रक्रिया है। आजादी के आंदोलन के साथ-साथ भारत में संचालित संस्कृति का आंदोलन के मूल्य को लेकर भारत का संविधान निर्माण हुआ है। वैश्विक आर्थिक शक्तियां देश की सरकारों को स्थिर कर रही है। केंद्रीकरण जितना होगा उतना ही जनता की शक्ति घटेगी। दूसरे सत्र की अध्यक्षता परमानंद राय ने की और संचालन गणेश दत्त कुशवाहा में।

इस सत्र में मुख्य रूप से जे.पी. आंदोलन में वैसे आंदोलनकारी जो सहभागी रहे थे, लेकिन जेल नहीं गए थे या कुछ कुछ अवधि के लिए जेल गए। उनको भी पेंशन देने के सवाल पर बैठक में विचार किया गया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस प्रक्रिया को तेज किया जाए। भूमिगत जेपी सेनानी ने जेल से अधिक कष्ट भोगे है। इन्हें जे पी सेनानी का दर्जा देते हुए पेंशन प्रदान किया जाए। इस मौके पर भागलपुर प्रमंडल के विभिन्न प्रखंडों से प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य रूप से जयंत जलद, रंजीत कुमार, लक्ष्मण दास, योगेंद्र मंडल, गिरधारी मंडल, भुवनेश्वर मंडल, छेदी दास, राज नारायण, स्वामी शरण दास, विष्णु देव रजक, सुभाष सिंह, ललन प्रसाद आदि मौजूद थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर