ऑपरेशन क्लीन का दिखा असर, कटिहार आरपीएफ ने तीन अलग-अलग मामलों में की ताबड़तोड़ कार्रवाई
कटिहार, 08 जुलाई (हि.स.)। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और रेलवे स्टेशन को अपराधमुक्त बनाने के उद्देश्य से कटिहार रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ का विशेष अभियान रंग ला रहा है।
आरपीएफ कमांडेंट संदीप कुमार पीएस के निर्देश और ईस्ट पोस्ट कमांडर विक्रम कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत महज तीन दिनों के भीतर पुलिस को तीन बड़ी कामयाबियां हासिल हुई हैं।
आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक भटके हुए नाबालिग को रेस्क्यू किया, भारी मात्रा में शराब की खेप जब्त की और यात्रियों का मोबाइल उड़ाने वाले तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
आरपीएफ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, आरपीएफ ने ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' के तहत प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर भटक रहे एक 12 वर्षीय नाबालिग बालक को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
पुलिस ने बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और फिर चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से उसे बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया, ताकि उसे सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक तस्कर को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपी की पहचान कटिहार जिले के ही निवासी टुनटुन साह उर्फ मनोज कुमार साह के रूप में हुई है। उसके पास से 64 बोतल (लगभग 31 लीटर) प्रतिबंधित शराब बरामद की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत 7,160 रुपये आंकी गई है।
बुधवार को स्टेशन परिसर में चलाए गए एक अन्य विशेष अभियान में आरपीएफ ने यात्रियों के मोबाइल चोरी करने वाले तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान मो. अमन, राज कुमार हारी और सजन हारी के रूप में हुई है, जो कटिहार जिले के ही रहने वाले हैं। उनके पास से करीब 40 हजार रुपये मूल्य के तीन चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
आरपीएफ ईस्ट पोस्ट कमांडर विक्रम कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। स्टेशन परिसर और ट्रेनों में मानव तस्करी, नशे की तस्करी और चोरी जैसी घटनाओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के लिए आरपीएफ द्वारा यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही, आरपीएफ इंस्पेक्टर ने आम यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत आरपीएफ को दें।
हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह