आजादी के 80 साल बाद भी 25 परिवार बुनियादी राह को तरसे, मुख्य सचिव के आदेश को स्थानीय अधिकारी ने डाला ठंडे बस्ते में
भागलपुर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। बिहार सरकार के सर्वोच्च अधिकारियों के आदेशों को स्थानीय स्तर पर किस तरह ठंडे बस्ते में डाला जाता है, इसका एक जीता-जागता उदाहरण सुल्तानगंज प्रखंड की नयागांव पंचायत के वार्ड संख्या 1 में देखने को मिल रहा है। आजादी के लगभग 80 साल बीत जाने के बाद भी यहां के 25 परिवार एक अदद बुनियादी रास्ते के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति तब है जब यह सड़क सरकारी नक्शे में अनाबाद बिहार सरकार (खाता संख्या: 573, खेसरा: 480, रकबा: 14 डिसमिल) के रूप में दर्ज है। नयागांव पंचायत के समाजसेवी धीरेन्द्र कुमार और स्थानीय ग्रामीणों ने सरकारी पत्राचार के दस्तावेज दिखाते हुए प्रशासनिक तंत्र के विरोधाभासी रवैये और विभागीय लापरवाही को उजागर किया है।
ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी सुल्तानगंज ने वरीय उप समाहर्ता को लिखित आश्वासन दिया था कि सड़क का निर्माण जल्द कराया जाएगा। 06 अगस्त 2026 मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के अवर सचिव और स्वयं मुख्य सचिव द्वारा सड़क निर्माण के संबंध में आवश्यक निर्देश व पत्र जारी किया गया था। 07 अक्टूबर 2026 शासन के सर्वोच्च आदेशों को ताक पर रखकर, स्थानीय बीपीआरओ द्वारा सहयोग पोर्टल पर अचानक रिपोर्ट लगा दी गई कि जमीन पर 'टाइटल सूट' है और सड़क का निर्माण नहीं होगा।
समाजसेवी धीरेन्द्र कुमार और ग्रामीणों का कहना है कि जब यह जमीन पूर्णतः अनाबाद बिहार सरकार (सरकारी) है और इस पर किसी भी सिविल कोर्ट का कोई स्टे ऑर्डर नहीं है, तो एक ब्लॉक स्तर का बीपीआरओ किस कानून के तहत मुख्य सचिव और अवर सचिव के आदेशों को दरकिनार कर अपनी मनमानी कर रहा है? रास्ता नहीं होने के कारण गांव में बीमारी या आपातकाल के समय एम्बुलेंस या ऑटो तक नहीं आ पाता है। ग्रामीणों को मजबूरी में मरीजों को खाट पर टांगकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बीपीआरओ की इस मनमानी रिपोर्ट की उच्च स्तरीय जांच की जाए और मुख्य सचिव के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो पीड़ित सभी 25 परिवार भागलपुर डीएम कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन पर बैठने और पटना हाईकोर्ट में मानहानि/अवमानना का केस दर्ज कराने को मजबूर होंगे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर