17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास,नहीं होगे मांगलिक कार्य
पूर्वी चंपारण,11 मई (हि.स.)। बैंड बैंड,बाजा,बारात,विवाह तिलक उत्सव आदि की धूम पर जल्द विराम लगने वाला है 17 मई से आरंभ हो रहे हैं पुरुषोत्तम मास।इस मास के शुरू होने पर प्रथम बार किए जाने वाले सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी पुनः 15 जून को मलमास(अधिमास)की समाप्ति के बाद मांगलिक कार्यों मुहूर्त प्राप्त होंगे।
आचार्य रासबिहारी द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस अधिक मास में 30 दिनों में क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए इसे लेकर लोगों में भ्रम है,हालांकि शास्त्रों में स्पष्ट व्यवस्था दी गईं हैं।
द्विवेदी ने बताया कि अधिक मास में फल प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले सभी कार्य प्रथम बार तीर्थ यात्रा आरंभ,गृह निर्माण का आरम्भ,गृह प्रवेश विवाह आदि मंगल कार्य या किसी व्रत का आरंभ उद्यापन जन्म के 6 महीने होने बाद वाले सभी संस्कार जैसे करण वेद मुंडन, यज्ञोपवीत संस्कार, समावर्तन विवाह,वधू प्रवेश आदि वर्जित है, हालांकि जिन कार्यों के लिए फिर मुहूर्त या अवसर नहीं मिलेंगे यह आवश्यक है उन पर रोक नहीं है। इस महीने में निष्काम भाव से किए गए व्रत आदि का अक्षय फल होता है।
भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस माह का फलदाता भोक्ता अधिष्टा सब कुछ मैं हूं अतः इस महीने कृत्य का अक्षय फल होता है ब्राह्मण और साधुओं सहित दिन दुःखियो की सेवा इस मास में सर्वोत्तम माना गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार