फरक्का जल संधि पर जदयू का ‘नीतीश संवाद’ आज

 


सुपौल, 11 सितंबर (हि.स.)। फरक्का जल संधि को लेकर जनता दल यूनाइटेड (यू) की ओर से शनिवार को जन-जागरूकता कार्यक्रम ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ का आयोजन किया जाएगा। जदयू के जिला अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से फरक्का जल संधि से बिहार को होने वाले कथित नुकसान और इसके प्रभावों को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

पत्र के अनुसार, 12 दिसंबर 1996 को भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर 30 वर्ष का द्विपक्षीय समझौता हुआ था। इसकी 30 वर्ष की समय-सीमा दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। जदयू का कहना है कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि के कारण बिहार पिछले तीन दशकों से गंभीर पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान झेल रहा है।

पत्र में कहा गया है कि फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा होने से नदी का तल ऊंचा हो गया है तथा प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है। इसका असर मानसून के दौरान उत्तर बिहार के तटीय जिलों में बाढ़ के रूप में देखने को मिलता है। वहीं, जल संधि के कारण गंगा और उसकी सहायक नदियों का पानी फरक्का बराज की ओर दिए जाने से सिंचाई, पेयजल और विकास कार्यों के लिए जल की उपलब्धता प्रभावित होने का दावा किया गया है। इससे बिहार में बाढ़ और सुखाड़ दोनों की समस्या बढ़ने की बात कही गई है।

जदयू ने पत्र में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पूर्व में दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया है। साथ ही बताया गया है कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने हाल में राज्यसभा में फरक्का जल संधि को बिहार के हित में नहीं बताते हुए इसके नवीनीकरण पर सवाल उठाया था।

उन्होंने कहा था कि यदि कोई नई संधि होती है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पत्र के मुताबिक, राज्यहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जन-जागरूकता के लिए जदयू की ओर से ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा समेत पार्टी के नेता गंगा किनारे बसे 12 जिलों में लोगों के बीच संवाद करेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र