कटिहार केवीके में कृषि सखियों का 5 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, किसानों और विभाग के बीच बनेंगी सेतु
कटिहार, 31 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कटिहार में कृषि सखियों के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को विधिवत समापन हो गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) ने सभी प्रशिक्षित कृषि सखियों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उन्हें रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम कर प्राकृतिक खेती के विस्तार में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों में दक्ष बनाकर उन्हें किसानों और कृषि विभाग के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में तैयार करना है, ताकि जिले भर में पर्यावरण अनुकूल खेती का दायरा बढ़ाया जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. मृणाल वर्मा ने कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती के मूलभूत सिद्धांतों, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से खेती की लागत घटाने वाले प्राकृतिक आदानों जैसे—जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत के निर्माण, भंडारण और फसलों पर उनके प्रयोग की विधियों से अवगत कराया।
वहीं सस्य विज्ञान की विषय वस्तु विशेषज्ञ (एसएमएस) संजू कुमारी ने फसल उत्पादन में प्राकृतिक तकनीकों, बीज उपचार, फसल विविधीकरण, मृदा उर्वरता प्रबंधन तथा उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा किसान मास्टर ट्रेनर सत्य नारायण शर्मा ने प्राकृतिक खाद और कीटनाशक तैयार करने के व्यावहारिक पहलुओं को प्रतिभागियों के साथ साझा किया।
समारोह को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी ने प्रशिक्षित सखियों से आह्वान किया कि वे कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को गांव-गांव तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता कम कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना समय की मांग है, जिसमें कृषि सखियों की भूमिका सबसे निर्णायक साबित होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह