बीएयू की अनुठी पहल, त्वचा-अनुकूल प्राकृतिक गुलाल का किया जा रहा निर्माण

 


भागलपुर, 28 फ़रवरी (हि.स.)। जिले के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने एक अनूठी और पर्यावरण-अनुकूल पहल के तहत मंदिरों में अर्पित अस्थायी पुष्प अपशिष्ट (टेम्पोरल फ्लावर वेस्ट) से प्राकृतिक, त्वचा-अनुकूल गुलाल का सफल उत्पादन प्रारंभ किया है।

यह कार्य कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा गॉड टू गॉड थीम के अंतर्गत तैयार गुलाल को पुनः मंदिरों को समर्पित किया जा रहा है, जिससे श्रद्धा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास का सुंदर समन्वय स्थापित हो रहा है। यह प्राकृतिक गुलाल पूर्णतः रासायनिक रंगों से मुक्त है तथा त्वचा के लिए सुरक्षित पुष्पों से तैयार किया जाता है। इसकी शेल्फ लाइफ तीन वर्षों तक है। शुद्ध पुष्पों से प्राप्त आवश्यक तेलों (एसेंशियल ऑयल) के समावेशन के कारण यह उत्पाद न केवल त्वचा के लिए लाभकारी है, बल्कि अरोमा थेरेपी के माध्यम से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव भी डालता है।

इस संदर्भ में पुष्प विज्ञान एवं उद्यान सज्जा विभाग की डॉ. दीप्ति सिंह वर्ष 2023 से विश्वविद्यालय के फ्लावर प्रोसेसिंग प्रयोगशाला में गेंदा, बुल्गारियन गुलाब, मोगरा, अपराजिता, गुड़हल, पलाश सहित सुगंधित पुष्प का उपयोग कर दस से अधिक रंगों में प्राकृतिक गुलाल का निर्माण कर रही हैं। तैयार गुलाल के साथ-साथ इसकी आकर्षक एवं उपयोगी पैकेजिंग को भी मानकीकृत किया गया है, ताकि भविष्य में ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा दिया जा सके।

विश्वविद्यालय केवल गुलाल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिरों के पुष्प अपशिष्ट से विभिन्न शुष्क पुष्प उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें ग्रीटिंग कार्ड, बुकमार्क, पेन स्टैंड, टेबल टॉप सजावट, वॉल क्विल्ट, प्राकृतिक दृश्यों की कलाकृतियाँ, टेबल मैट एवं कोस्टर सेट शामिल हैं। यह पहल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल प्राकृतिक और सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध करा रही है, बल्कि कचरे से कंचन की अवधारणा को साकार करते हुए समाज को सतत् एवं हरित भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर