दो दिवसीय राष्ट्रीय जन संवाद की शुरुआत

 


भागलपुर, 29 अगस्त (हि.स.)। गंगा मुक्ति आंदोलन के बैनर तले भारत बंगलादेश फरक्का जल समझौता के संदर्भ में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय जन संवाद की शुरुआत हुई।

कार्यक्रम शुजागंज के एक होटल में आयोजित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुज्जफरपुर के साथी शाहिद कमाल और संचालन उदय एवं महेंद्र यादव ने किया। गंगा मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वयक राम शरण ने यूपी, बंगाल, बिहार और झारखंड से आये नदीकर्मियों का स्वागत किया।

वरिष्ठ सामाज एवं संस्कृति कर्मी उदय ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कहा कि हम लोग फरक्का ही नहीं देश और दुनियां में बने बांध बैराजों के खिलाफ रहे हैं। इस वर्ष के दिसंबर में बंगलादेश फरक्का जल संधि समाप्त हो रहा है। इस जन संवाद में आपसी चर्चा कर अपना पक्ष तय करना उद्देश्य है।

जन संवाद में वर्तमान विकास नीति, जलवायु संकट आदि पर भी गंभीरता पूर्वक चर्चा हुई। चर्चा करते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि पर्यावरण सिर्फ किसी देश या क्षेत्र का मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा है। आज हम नेपाल की विभीषिका को देख रहे हैं जो ग्लोबल वार्मिंग का नतीजा है। हम अपने अनुसार पर्यावरण को नियंत्रित नहीं कर सकते।

आज सरकारें बिजली उत्पादन के नाम पर पहाड़ी नदियों पर बड़े-बड़े बांध बना रही है जो निचले क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए विनाशक है। इसके कारण बाढ़ सुखाड़, भूस्खलन, भूकंप आदि हो रहे हैं। कोसी क्षेत्र के विशेषज्ञ नदी वैज्ञानिक महेंद्र यादव ने फरक्का बराज पर भारत और बांग्लादेश के बीच हुए समझौता को सबके सामने रखा। राष्ट्रीय जन संवाद में सभी ने एक स्वर से यह मांग की कि चूँकि अब फरक्का जलसंधि की मियाद पूरी हो गई है। इसलिए नए तौर पर कोई संधि ना करते हुए फरक्का बराज सहित तमाम नदियों पर बने बांध-बराज को तोड़ दिया जाए। जिससे नदियां अविरल बह सके।

मौके पर ऑनलाइन गंगा मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अनिल प्रकाश नदी घाटी मंच के संयोजक गौतम बंदोपाध्याय ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि नदियों को बांधकर हम सिर्फ नदी नहीं मारते बल्कि पूरी सभ्यता को ही नष्ट कर रहे हैं। गंगा और उनकी सहायक नदियों पर हिमालय से लेकर गंगा तक में लगभग 1200 छोटे बड़े बांध बराज बनाए जा चुके हैं। इन बांधों के कारण नदियों का प्रवाह बाधित होता है और नदी में रहने वाले जीव जंतु उनका प्राकृतिक आवास आवागमन का रास्ता सब नष्ट हो जाता है। इसे रोक बिना हम नदियों को जिंदा नहीं रख सकते और इसके विनाशकारी तकतों को भी नहीं रोक पाएंगे।

इस अवसर पर नदी बचाओ जीवन बचाओ आंदोलन, बंगाल के तापस दास, कोशी में कार्यरत यूपी के सक्रियकर्मी महेंद्र यादव, रत्ना डा योगेंद्र आदि ने भी अपनी बातें रखी। मौके पर योगेंद्र सहनी, निर्मल, गौतम कुमार, नरेश सिंह, रोहित कुमार, अनिरुद्ध, कुमार कृष्णन, मो. बाकिर, मनोज मीता नें नदियों की अविरलता पर जोर दिया। राष्ट्रीय जन संवाद कल भी जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर