नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को संवैधानिक अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम-ईं शैलेन्द्र
भागलपुर, 26 अप्रैल (हि.स.)। भागलपुर में आयोजित जन-आक्रोश महिला सम्मेलन के दौरान महिला आरक्षण को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई। प्रेस वार्ता में बिहपुर विधायक इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कहा कि भारत सदियों से नारी शक्ति का पूजक रहा है, लेकिन राजनीति में महिलाओं की भागीदारी हमेशा सीमित रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने वर्षों तक महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल राजनीति की, लेकिन संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।
उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश विधेयक पेश किए गए हैं। इनका उद्देश्य 2029 तक लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है। यह सिर्फ आरक्षण नहीं, बल्कि लोकतंत्र में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी की शुरुआत है। उनका दावा है कि इससे देश की राजनीति में संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और संतुलन का नया अध्याय शुरू होगा। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष साह और प्रवक्ता डॉ प्रीति शेखर मौजूद रहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर