किशनगंज में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को गति, ज्ञान भरतम अभियान में मिली ऐतिहासिक पांडुलिपियां
किशनगंज, 10 अप्रैल (हि.स.)। ज्ञान भरतम मिशन के तहत किशनगंज जिले में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संचालित इस अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों पर पांडुलिपियों की खोज और संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें ‘ज्ञान भरतम’ पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। साथ ही इन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर उन्हें सुरक्षित रखने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर संरक्षित रह सके।
जिला प्रशासन द्वारा इस कार्य के लिए जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया गया है। उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा को इसका नोडल पदाधिकारी बनाया गया है, जिनके नेतृत्व में मस्जिदों, मदरसों, मंदिरों, निजी पुस्तकालयों एवं ऐतिहासिक भवनों में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी विशाल राज ने खगड़ा स्थित नवाब साहब की ऐतिहासिक कोठी का निरीक्षण किया।
इस दौरान उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, कृषि कॉलेज किशनगंज के सहायक प्रोफेसर शिव वरन सिंह एवं एआई विशेषज्ञ प्रेम पीयूष भी मौजूद रहे। टीम ने कोठी में संरक्षित ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं पांडुलिपियों का अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान खगड़ा स्थित नवाब साहब की हवेली से फारसी, पर्शियन एवं उर्दू भाषा में लिखित लगभग पांच से छह हस्तलिखित दस्तावेज प्राप्त हुए, जिनमें कुछ दस्तावेज वर्ष 1916 के आसपास के बताए जा रहे हैं। इन पांडुलिपियों को सर्वेक्षण अभियान के तहत संकलित कर सुरक्षित डिजिटलीकरण के लिए लिया गया है। इस अवसर पर खगड़ा के अंतिम नवाब साहब के वंशज सैयद मुदस्सर मिर्ज़ा, सैयद ज़ैग़म मिर्ज़ा एवं सैयद अली अब्बास मिर्ज़ा ने हवेली में संरक्षित बहुमूल्य दस्तावेज स्वेच्छा से उपलब्ध कराए।
जिलाधिकारी ने उनके सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण संभव है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां उपलब्ध हों, तो वे ज्ञान भरतम अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि प्राप्त दस्तावेजों का सुरक्षित संरक्षण एवं डिजिटलीकरण किया जाएगा। जिला प्रशासन ने बताया कि आने वाले दिनों में जिले में पांडुलिपियों के संग्रहण एवं डिजिटलीकरण अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह