गर्भवती घायल महिला को दौड़ाया, सदर अस्पताल के डॉक्टर आशीष रंजन बने मसीहा

 


भागलपुर, 02 जून (हि.स.)। जिले के मायागंज अस्पताल का रवैया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सड़क हादसे में घायल सात माह की गर्भवती महिला को तत्काल इलाज देने के बजाय अस्पताल से रेफर स्लिप लाने के लिए भेज दिया गया। वहीं सदर अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष रंजन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महिला का इलाज कर उसकी जान बचाई।

मामला अलीगंज निवासी रूपा देवी का है जो सात माह की गर्भवती हैं। सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मंगलवार को परिजन उन्हें इलाज के लिए मायागंज अस्पताल लेकर पहुंचे।

आरोप है कि अस्पताल में पंजीकरण और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद महिला को भर्ती नहीं किया गया और पहले सदर अस्पताल से रेफर स्लिप लाने को कहा गया। दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा जाता रहा। ऐसे समय में जब हर मिनट महत्वपूर्ण था। मायागंज अस्पताल की कार्यशैली ने कई सवाल खड़े कर दिए। आखिर गंभीर रूप से घायल गर्भवती महिला को तत्काल उपचार क्यों नहीं मिला। इसके बाद महिला को सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष रंजन ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू कराया। उनकी तत्परता और संवेदनशीलता के कारण महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी।

डॉ. रंजन ने कहा कि किसी भी गंभीर मरीज विशेषकर गर्भवती महिला को कागजी प्रक्रिया के नाम पर अस्पतालों के बीच नहीं दौड़ाया जाना चाहिए।

एक तरफ मायागंज अस्पताल का रवैया सवालों के घेरे में है, तो दूसरी तरफ डॉ. आशीष रंजन की मानवीय पहल की लोग सराहना कर रहे हैं। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में संवेदनशीलता और जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर उजागर करती है।

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर