मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
समस्तीपुर, 29 मार्च (हि.स.)। बिहार में समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित डॉ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केन्द्र बिरौली द्वारा विश्वविद्यालय के मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्टता केंद्र के प्रायोजन में “मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ आर.के. तिवारी एवं मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्टता केंद्र की नोडल पदाधिकारी डॉ पुष्पा सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित किसानों एवं प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ पुष्पा सिंह ने मखाना फसल के बढ़ते महत्व, इसके पोषण मूल्य तथा बिहार विशेषकर समस्तीपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में इसके व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मखाना न केवल किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है, बल्कि यह निर्यात की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण फसल बनती जा रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ आर.के. तिवारी ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र बिरौली द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों के खेतों पर प्रत्यक्षण (डेमो) एवं नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वैज्ञानिक तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समस्तीपुर सहित पूरे क्षेत्र में मखाना की खेती को एक संगठित एवं व्यावसायिक रूप देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सके।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र के उद्यान विशेषज्ञ डॉ धीरु कुमार तिवारी ने मखाना उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने तालाब आधारित मखाना उत्पादन एवं खेत में मखाना की खेती के विभिन्न तरीकों को चरणबद्ध तरीके से समझाया। साथ ही उन्होंने नर्सरी प्रबंधन, पौध रोपण विधि, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर मखाना की उत्पादकता एवं गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, सहायक प्राध्यापक डॉ अभिषेक उपाध्याय ने मखाना खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न आधुनिक यंत्रों एवं मशीनों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यंत्रीकरण से श्रम लागत में कमी आती है और कार्य दक्षता में वृद्धि होती है। वहीं, सहायक प्राध्यापक डॉ कुलविंदर कौर ने मखाना प्रसंस्करण की विभिन्न विधियों पर प्रकाश डालते हुए इसके मूल्य संवर्धन की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मखाना से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार कर किसानों की आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान ई. विनिता कश्यप ने मखाना उत्पादन में ड्रोन तकनीक के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन के माध्यम से फसल की निगरानी, पोषक तत्वों का छिड़काव एवं कीटनाशकों का सटीक उपयोग संभव है, जिससे समय एवं लागत दोनों की बचत होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवीके की कर्मी निशा रानी सहित अन्य वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही, विभिन्न प्रखंडों से आए बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण की नवीनतम तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा व्यक्त की।
हिन्दुस्थान समाचार / त्रिलोकनाथ उपाध्याय