जय माता दी' के जयघोष से गूंजा महाकाल मंदिर, मां महागौरी की हुई विशेष आराधना
किशनगंज, 22 जुलाई (हि.स.)। गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में बुधवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
भक्तों ने मां महागौरी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, भगवान महाकाल का जलाभिषेक तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया। शाम को आयोजित भव्य महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। जय माता दी और जय महाकाल के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
गुरु साकेत ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिनमें गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक एवं तांत्रिक महत्व है। उन्होंने कहा कि मां भगवती की सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ, आरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने देवीभागवत पुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि मां महागौरी भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में पूजित हैं और उनकी उपासना से पापों का नाश तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन, नारियल का भोग तथा हलवा-पूड़ी, काले चने और सब्जी का प्रसाद अर्पित करने की विशेष परंपरा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कर श्रद्धापूर्वक पूजा करने का भी आग्रह किया। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और भक्तों की आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने मां महागौरी से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए प्रसाद ग्रहण किया।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह