महागौरी की आराधना में उमड़ा आस्था का सैलाब, दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से गूंजा सुपौल
सुपौल, 18 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर रविवार को सुपौल में मां दुर्गा की आराधना को लेकर श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर रहा। मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। जिला मुख्यालय के निराला नगर स्थित ऐतिहासिक बड़ी दुर्गा स्थान से लेकर गांधी मैदान और माल गोदाम परिसर तक उत्सव की रौनक देखने को मिली। दुर्गा सप्तशती के मंत्रों, शंखध्वनि और घंटियों की गूंज के बीच मां के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय बना रहा। शाम की महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने मां के चरणों में फूल, प्रसाद और चुनरी अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। निराला नगर स्थित ऐतिहासिक बड़ी दुर्गा स्थान नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। महाअष्टमी पर सुबह से ही मां के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में माथा टेककर सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। संध्या आरती के दौरान दीपों की रोशनी, घंटियों की गूंज और सामूहिक जयकारों से मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। शहर के गांधी मैदान, बड़ी दुर्गा स्थान निराला नगर,रेलवे माल गोदाम परिसर में बने दुर्गा पूजा पंडालों में भी महाअष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। आकर्षक सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी से सजे पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
मंदिरों और पूजा स्थलों पर लोगों ने विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर सामूहिक आरती और देवी स्तुति में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पूजा पंडालों के आसपास चहल-पहल बनी रही। मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने नवरात्र के प्रति लोगों की गहरी आस्था को प्रदर्शित किया।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
महाअष्टमी पर सुपौल में मंदिरों से लेकर पूजा पंडालों तक आस्था और उल्लास की धारा बहती रही। मां महागौरी के जयकारों से गूंजते वातावरण में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। नवरात्र के अंतिम चरण में बढ़ती चहल-पहल और पूजा-अर्चना के आयोजनों ने पूरे जिले को भक्तिमय बना दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र