मधुश्रावणी व्रत शुरू, नवविवाहिताओं ने अखंड सौभाग्य के लिए की शिव-पार्वती की पूजा

 


भागलपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। मिथिला का प्रसिद्ध लोकपर्व मधुश्रावणी सोमवार से पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया। यह पर्व नवविवाहित महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है।

शादी के बाद पड़ने वाले पहले सावन में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। पर्व के पहले दिन नवविवाहिताओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के साथ नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मिथिलांचल की संस्कृति से जुड़े इस पर्व में नवविवाहिताएं प्रतिदिन विशेष पूजा करती हैं, पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और बड़े-बुजुर्गों से मधुश्रावणी की पौराणिक कथाएं सुनती हैं।

इस पर्व के माध्यम से नई नवेली दुल्हनों को मिथिला की संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और वैवाहिक जीवन के संस्कारों की सीख दी जाती है। इसी क्रम में भागलपुर के मानिकपुर की नवविवाहिता निशा मिश्रा ने भी अपने पति रोशन मिश्रा की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए मधुश्रावणी व्रत की शुरुआत की। उन्होंने पूरे नियम-निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना कर महादेव और माता गौरी से परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद मांगा। कई दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान का समापन अंतिम दिन विशेष पूजा और बड़ों के आशीर्वाद के साथ होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर