जेल के कैदियों के द्वारा बनाए गए माला से होती है मां खड़गेश्वरी काली मां की पूजा,45 सालों से निभाई जा रही परंपरा

 








अररिया 08 नवम्बर(हि.स.)। विश्व का सबसे ऊंचा मां खड़गेश्वरी काली मंदिर में 45 सालों से परंपरा का निर्वहन हो रहा है। दीपावली की मध्य रात्रि को होने वाली मां खड़गेश्वरी काली मंदिर में मां काली की पूजा अर्चना के साथ मां काली को पहनाएं जाने वाले फूलों के माला का निर्माण मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदियों के द्वारा तैयार किया जाता है।

मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर में आस्था की एक अनूठी परंपरा करीब 45 साल से निभाई जा रही है।इतना ही नहीं प्रतिदिन होने वाले मां काली की पूजा के लिए मंडल कारा के विचाराधीन कैदी रोज फूलों की माला बनाते हैं।

जेल प्रशासन के जरिए यह माला मंदिर पहुंचाई जाती है और इसी से मां खड्गेश्वरी की पूजा होती है। काली पूजा के अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है और तोरण द्वार बनाए गए हैं।

मंदिर में कैदियों की माला से पूजा की परंपरा एक भक्त से शुरू हुई थी। बताया जाता है कि मंदिर में नियमित पूजा करने वाला एक भक्त किसी कारण से जेल चला गया। जेल में रहने के दौरान भी उसकी मां काली के प्रति श्रद्धा बनी रही।

उसने फूलों की माला बनाकर मंदिर भेजनी शुरू की। धीरे-धीरे यह सिलसिला परंपरा बन गया। आज मंडल कारा के बंदी रोज माला बनाते हैं और जेल के सुरक्षाकर्मी उसे मंदिर पहुंचाते हैं। मां काली के साधक नानू बाबा इसी माला से मां की पूजा करते हैं।

मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर की स्थापना 1884 में हुई थी। मंदिर के साधक स्वामी सरोजानंद जी महाराज उर्फ नानू बाबा ने 1970 में मंदिर की जिम्मेदारी संभाली।उस समय मंदिर टीन की झोपड़ी में था। नानू बाबा की साधना और भक्तों के सहयोग से मंदिर का विस्तार शुरू हुआ।

मंदिर का निर्माण कार्य 1978 में शुरू हुआ और 1982 में 152 फीट ऊंचा गुंबद बनकर तैयार हुआ। यह गुंबद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। काली पूजा के दौरान मंदिर परिसर की विशेष सजावट की जाती है।

मंदिर में प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को विशेष पूजा और महाभोग का आयोजन होता है। इन दिनों मां का विशेष श्रृंगार किया जाता है। रंग-बिरंगी चुनरी और फूलों की मालाओं से दरबार सजाया जाता है। रात में खीर, खिचड़ी और पुलाव का भोग लगाया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं।

नानू बाबा ने अपना जीवन मां काली की साधना और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।

बताया जाता है कि उन्होंने अपनी निजी संपत्ति का बड़ा हिस्सा मंदिर निर्माण, मस्जिद, स्कूल और जरूरतमंदों की सहायता में दान किया। सभी धर्मों के प्रति उनका सम्मान भी चर्चा में रहता है। वे अररिया की प्रसिद्ध जामा मस्जिद में भी दंड प्रणाम करने जाते हैं।

आज मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा नेपाल और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। काली पूजा के दौरान यहां विशेष भीड़ रहती है। मंदिर की पहचान 152 फीट ऊंचे गुंबद और धार्मिक आस्था है कहा जाता है कि मां खड़गेश्वरी काली मां की शक्ति अपरम्पार है और जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मुरादें मांगते हैं,उनकी मुराद पूरी होती है।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर