यात्रा से परिष्कृत होता है अनुभव, समृद्ध होता है साहित्य : प्रो. विजय कुमार

 


दरभंगा, 14 अक्टूबर (हि.स.)। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में चित्र-यात्रा प्रदर्शनी के साथ ‘यात्रा-वृत्तांत’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीता झा ने किया। प्रदर्शनी का संयोजन हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने किया। इस अवसर पर पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. एके बच्चन एवं राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने प्रदर्शनी की सराहना की।

प्रदर्शनी में वर्ष 2024 से 2026 के बीच विभागीय शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा बिहार, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की यात्राओं के दौरान लिए गए चित्र प्रदर्शित किए गए। इनमें राजनगर, मधुबनी, बोधगया, राजगीर, नालंदा, शिमला, कुल्लू, मनाली, कोकसर, रोहतांग और जनकपुरधाम के चित्र प्रमुख रहे। प्रो. उमेश कुमार के नेतृत्व में आयोजित इन यात्राओं के दौरान विद्यार्थियों ने संबंधित स्थलों की सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं साहित्यिक गतिविधियों को करीब से जाना। यात्रा-अनुभवों से प्रेरित होकर शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने आलेख भी लिखे, जिनमें से कुछ प्रकाशित हो चुके हैं।

उद्घाटन संबोधन में प्रो. पुनीता झा ने कहा कि यात्रा व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाने के साथ उसके साहित्यिक अनुभवों को भी समृद्ध करती है। ऐसी प्रदर्शनियां शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. विजय कुमार ने कहा कि यात्रा-वृत्तांत हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है। अनेक साहित्यकारों ने इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक परिस्थितियों, सामाजिक परिवेश और जीवनशैली से पाठकों को परिचित कराया है। यात्रा से मनुष्य के अनुभव परिष्कृत होते हैं और उसकी दृष्टि व्यापक बनती है।

प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि यात्रा साहित्य और कला-सृजन को नई प्रेरणा देती है तथा अनुभूतियों को प्रगाढ़ बनाती है। हिंदी में यात्रा-वृत्तांत लेखन की परंपरा भारतेन्दु युग से विकसित हुई। राहुल सांकृत्यायन, अज्ञेय और नागार्जुन जैसे साहित्यकारों के लेखन में घुमक्कड़ी और यात्रा-अनुभवों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

डॉ. मंजरी खरे ने कहा कि यात्रा जीवन को नया अर्थ देने के साथ अनुभूतियों को नए आयाम प्रदान करती है। वहीं, डॉ. बिंदु चौहान ने प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी ऐसी प्रदर्शनियों को प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बताया।

कार्यक्रम में मलय नीरव, सुभद्रा कुमारी, कंचन रजक, जय प्रकाश, रोहित पटेल, स्नेहा कुमारी, बेबी कुमारी, सूफिया खातून, अपर्णा, धीरज, सूरज, सदानंद, प्रतिभा, मनीष सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra