पुरानी मार्कशीट वायरल कर भ्रम फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई: परीक्षा नियंत्रक जेपीयू
सारण, 16 जुलाई (हि.स.)। जयप्रकाश विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने डिजिलॉकर पर स्नातक सत्र 2024–28 सेमेस्टर एक के अंकपत्रों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि कुछ छात्र संगठनों द्वारा पुरानी त्रुटि का हवाला देकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है, ताकि विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल किया जा सके।
परीक्षा नियंत्रक डॉ अशोक कुमार मिश्रा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, अंकपत्र अपलोड करने के दौरान तकनीकी गड़बड़ी के कारण सेमेस्टर एक की जगह सेमेस्टर तीन अंकित हो गया था। हालांकि छात्रों के प्राप्तांक और परिणाम पूरी तरह सुरक्षित थे। विश्वविद्यालय ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मार्च, 2026 में ही इस मानवीय त्रुटि को ठीक कर संशोधित अंकपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए थे। वर्तमान में पोर्टल पर सभी दस्तावेज पूरी तरह अद्यतन और सही हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पाया कि कुछ संगठनों द्वारा सोशल मीडिया पर फरवरी, 2026 में डाउनलोड किए गए पुराने अंकपत्रों को साझा कर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जो तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने जैसा है। इसके अतिरिक्त, कुछ समाचार माध्यमों ने भी विश्वविद्यालय का पक्ष जाने बिना खबरें प्रकाशित की हैं।
परीक्षा नियंत्रक ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन जानबूझकर असत्य जानकारी फैलाकर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का प्रयास करेगा, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार