अंग क्षेत्र के अमर आवाज बिरजू भैया को लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने दी श्रद्धांजलि

 


भागलपुर, 24 फ़रवरी (हि.स.)। आवाज के जादूगर, आकाशवाणी भागलपुर के अवकाश प्राप्त उद्घोषक डॉ विजय कुमार मिश्रा (बिरजू भैया) अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरा अंग प्रदेश शोक में है।

अंग क्षेत्र की इस नूरानी, सशक्त और आत्मीय आवाज को श्रद्धांजलि देते हुए लोग भावभीने शब्दों में उन्हें याद कर रहे हैं। इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर मिलते ही भारत के विश्वविख्यात लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने भी अपनी नम आंखों से इस हमेशा के लिए गुम हुई आवाज को अनोखी श्रद्धांजलि दी। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने पांच घंटे के कठिन परिश्रम के बाद पीपल के हरे पत्तों पर आवाज के जादूगर विजय कुमार मिश्रा की अत्यंत ही बारीक और सूक्ष्म तस्वीर उकेरी और उस पर लिखा “हेलो फरमाइश, अलविदा बिरजू भैया।

सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने बताया कि मुझे आज भी वह दिन याद है, जब अंग प्रदेश के धरोहर दानवीर राजा कर्ण के इतिहास को युवा पीढ़ी में जागरूक करने के उद्देश्य से भागलपुर के नाथनगर स्थित कर्णगढ़ के मनोकामना मंदिर परिसर में दो दिनों के कठिन परिश्रम के बाद मैंने 20 टन बालू पर 10 फीट ऊंची भगवान इंद्र को कवच-कुंडल दान करते सूर्यपुत्र महान दानवीर कर्ण की मनमोहक आकृति बनाई थी। उसी के अगले दिन जनसत्ता की वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी के आग्रह पर 27 फरवरी 2025 को भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में आयोजित अंगिका महोत्सव कार्यक्रम देखने पहुंचा था। वहीं मुक्ताकाश मंच से जब उन्होंने बोलना शुरू किया, तो उनकी आवाज सुनकर मैं चौंक गया, क्योंकि बचपन में रेडियो पर जो आवाज सुना करता था, बिल्कुल वही आवाज सामने गूंज रही थी। जब उन्होंने अपना नाम बताया, तब विश्वास हुआ कि ये वही विजय कुमार मिश्रा हैं, जिन्हें रेडियो पर सुना करते थे। वह पल आज भी यादगार है। मुझे उनसे मिलने और उन्हें सामने से देखने का अवसर भी मिला था।

उन्हाेंने बताय बिरजू जी मेरी कलाकृति की काफी प्रशंसा कर रहे थे। उनकी आवाज में अपनापन, स्नेह और आत्मीयता की एक अलग ही मिठास थी, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी गूंज अंगिका माटी में सदैव सुनाई देती रहेगी। उल्लेखनीय है कि बिरजू नाम से प्रसिद्ध विजय कुमार मिश्रा ने अपनी विशिष्ट शैली, मधुर वाणी और अंगिका की आत्मीय अभिव्यक्ति से जन-जन के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनकी आवाज केवल प्रसारण नहीं थी, बल्कि अंग प्रदेश की संस्कृति, भाषा और भावना की सजीव धड़कन थी। प्रसारित होने वाला उनका लोकप्रिय कार्यक्रम “हेलो फरमाइश” केवल एक शो नहीं, बल्कि श्रोताओं के दिलों की धड़कन था। आज भले ही बिरजू भैया हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी अमर आवाज और स्मृतियां अंग प्रदेश की माटी में सदैव जीवित रहेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर