कांग्रेस कार्यालय की जमीन पर कब्जे की साजिश का आरोप
सीवान, 07 जून (हि.स.)। जिला कांग्रेस कार्यालय की जमीन को लेकर राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने भू-माफियाओं और कथित रूप से भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से पार्टी कार्यालय की ऐतिहासिक जमीन हड़पने की साजिश का गंभीर आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है।
रविवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में नेताओं ने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और कांग्रेस की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की लड़ाई है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जमीन पर कब्जे की कोशिश बंद नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि एक ओर कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के तहत बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर कुछ भू-माफिया ऐतिहासिक कांग्रेस कार्यालय पर गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने अधिकार और विरासत की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेगी।
बैठक में पूर्व जिलाध्यक्ष शिवधारी दुबे ने दावा किया कि वर्ष 1938 में भूमिदाता गोकुल प्रसाद ने महात्मा गांधी की मौजूदगी में तत्कालीन कांग्रेस नेता एवं बाद में देश के प्रथम राष्ट्रपति बने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को यह जमीन सौंपी थी। उन्होंने कहा कि यह स्थल स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इसे कब्जाने की कोशिश इतिहास के साथ खिलवाड़ है।
पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. विधु शेखर पांडेय ने कहा कि वर्ष 1988 में भी संबंधित पक्ष द्वारा लिखित रूप से यह स्वीकार किया गया था कि जमीन कांग्रेस को दान दी गई थी। इसके बावजूद यदि कोई इसे हड़पने का प्रयास कर रहा है तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
बैठक में मौजूद नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में जमीन विवाद को हवा दी जा रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी कार्यालय की एक-एक इंच जमीन बचाने के लिए सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष किया जाएगा। बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे तथा संगठन विस्तार के साथ-साथ भूमि विवाद के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma