लालबाग के राष्ट्रीय विद्यालय को संरक्षित स्मारक बनाने की कवायद तेज

 


दरभंगा, 14 अक्टूबर (हि.स.)।

दरभंगा शहर के लालबाग स्थित ऐतिहासिक राष्ट्रीय विद्यालय को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित कराने की दिशा में पहल तेज हो गई है। स्थानीय सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपालजी ठाकुर की पहल पर जिला प्रशासन ने स्थल निरीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण, जीर्णोद्धार और पर्यटन की दृष्टि से विकास करना है।

सांसद डॉ. ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय विद्यालय के संरक्षण के लिए उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, बिहार के मुख्यमंत्री तथा पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया था। इसके बाद बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के पुरातत्व निदेशालय के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन राष्ट्रीय विद्यालय की भूमि के मौजा, खाता, खेसरा, रकबा और संभावित अतिक्रमण से संबंधित विस्तृत विवरण तैयार कर पुरातत्व निदेशालय को भेजेगा। इसके बाद भूमि का सीमांकन, अतिक्रमण हटाने तथा विद्यालय भवन को संरक्षित स्मारक घोषित कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

सांसद ने राष्ट्रीय विद्यालय को स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक घटनाओं और राष्ट्रसेवी स्वर्गीय कमलेश्वरी चरण सिन्हा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय केवल दरभंगा ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मिथिला की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण और जीर्णोद्धार भावी पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय विद्यालय को संरक्षित स्मारक का दर्जा मिलने से इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

डॉ. ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय विद्यालय सहित दरभंगा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने राजकिला, शहर के तीनों ऐतिहासिक तालाबों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने तथा मिथिला की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दरभंगा और मिथिला की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को पुनर्जीवित कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अब राष्ट्रीय विद्यालय के संरक्षण से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है, इस पर स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों की नजर रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra