बरारी श्मशान घाट पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव

 




भागलपुर, 24 जून (हि.स.)।

भागलपुर के बरारी श्मशान घाट आज भी मूलभूत सुविधा विहीन है। जबकि यहां बिहार और झारखंड से कई जिलों के लोग शवों के अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। यहां का विद्युत शवदाह गृह बीते छह माह से खराब है।

यहां लोगों को चिलचिलाती धूप, बारिश और आंधी-तुफान के बीच खुले में शव का दाह संस्कार करना पड़ रहा है। यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जीवन के अंतिम सफर में लोग परेशानी झेलने को विवश हैं।

हालांकि नगर निगम प्रशासन और नगर विकास विभाग तमाम मूलभूत सुविधाएं होने का दावा करते हों लेकिन हकीकत यह है कि यहां मरने के बाद शव को जलाने के लिए श्मशान घाट पर समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां अंतिम यात्रा भी मजबूरियां भरी है। खुले आसमान के नीचे दाह संस्कार करने को लोग विवश हैं।

बरारी श्मशान घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह बीते आठ माह से बंद पड़ा है। हीटिंग एलिमेंट, टेंप्रेचर कंट्रोलर, स्टेनलेस स्टील रॉड, हीटिंग एलिमेंट ब्रिक, डिस्मेंटलिंग, क्लिनिंग सामग्री, ओवरहॉलिंग उपकरण, ट्रॉली, पैनल, केबल, फेब्रिकेटेड फ्यूल डक्ट, एग्जॉस्ट फैन सहित अन्य जरूरी उपकरण खराब हैं।

नगर निगम का कहना है कि उपकरणों की खरीद और इंस्टॉलेशन के बाद शवदाह गृह पहले की तरह सुचारु रूप से चालू हो जायेगा। बीते शाम आये आंधी-तुफान के कारण विद्युत शवदाह गृह का धुंआ निकलने वाला लोहे की चिमनी टूटकर गिर गगया है। अब इसे भी दुरुस्त करना पड़ेगा। श्मशान घाट की व्यवस्था की बात करें तो यहां एक प्याऊ बनाया गया है, जो काफी गंदा है। मार्ग में जलजमाव और कीचड़ जमा हुआ है। लोगों को श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कीचड़ से गुजरना पड़ रहा है।

श्मशान घाट पर शव का दाह संस्कार करना चिलचिलाती धूप और बारिश के बीच एक युद्ध लड़ने के बराबर है। यहां न ही शेड बनाया गया है न ही अन्य सुविधा दी गयी है। एक यात्री शेड है, जो घाट से दूरी पर बना हुआ है। यहां से दाह संस्कार करना संभव नहीं है। बिजली के लिए भी समुचित सुविधा नहीं है। अपने परिजन का दाह संस्कार करने आए लोगों ने कहा कि पहले चिलचिलाती धूप के दाह संस्कार शुरू किये। जब दाह संस्कार आखिरी मुकाम पर पहुंचा, तब आंधी और बारिश आ गयी। जिससे दाह संस्कार करने में कठिनाई हुई। हालांकि श्मशान घाट में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाना शुरू कर दिया है। अब देखना है कि यहां नागरिक सुविधा कबतक बहाल हो पाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर