एनएच-80 पर कहलगांव का कुआं पुल क्षतिग्रस्त, भारी वाहनों की आवाजाही ठप

 


भागलपुर, 07 अगस्त (हि.स.)। जिला अंतर्गत ऐतिहासिक और व्यस्त कहलगांव अनुमंडल में राष्ट्रीय राजमार्ग 80 पर स्थित कुआं नदी पुल के अचानक अत्यधिक जर्जर और क्षतिग्रस्त होने के कारण जिला प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस पर बड़े वाहनों के परिचालन को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है।

पुल के पिलर फटने और कंक्रीट के बड़े टुकड़े टूटकर गिरने के बाद रात के समय इसे पूरी तरह असुरक्षित घोषित किया गया।

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ट्रक, बस, कार और ट्रैक्टर समेत सभी प्रकार के भारी व चारपहिया वाहनों की एंट्री कुआं पुल पर पूरी तरह बंद कर दी गई है। वर्तमान में केवल मोटरसाइकिल सवार और पैदल यात्रियों को ही इस पुल से पार होने की अनुमति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि इन वाहनों को अब कहलगांव शहर के बाहरी या ग्रामीण इलाकों से होकर करीब 15 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त लंबा चक्कर काटकर गंतव्य तक जाना पड़ रहा है। ट्रकों और अन्य भारी मालवाहक वाहनों को पूरी तरह से डायवर्ट कर अन्य वैकल्पिक राज्य मार्गों की तरफ भेजा जा रहा है।

पुल के बंद होने से कहलगांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। इस कारण स्थानीय लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय के बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले गंभीर मरीजों और एम्बुलेंस को लंबे रास्ते से घूमकर जाना पड़ रहा है, जिससे समय पर इलाज मिलना कठिन हो गया है।

कहलगांव और आसपास के स्कूलों व कॉलेजों में जाने वाले छात्रों तथा दफ्तर जाने वाले दैनिक यात्रियों की राह बेहद मुश्किल हो गई है। पुल बंद होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। इसके कारण स्थानीय बाजारों में खाद्यान्न, फल-सब्जी, किराना सामान और निर्माण सामग्री के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

ग्रामीण ग्राहकों की संख्या घटने से छोटे दुकानदारों, होटल संचालकों और ऑटो चालकों की दैनिक आय प्रभावित हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग 80 पर स्थित यह कुआं नदी पुल काफी पुराना है जो समय के साथ जर्जर हो चुका था।

वर्तमान में इस एनएच-80 खंड के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग की देखरेख में किया जा रहा है। इस रूट के रखरखाव और पुल की तात्कालिक मरम्मत का जिम्मा एनएच विभाग द्वारा अनुबंधित निर्माण एजेंसी संभाल रही है। वहीं खबर मिलते ही विभाग के डीजीएम और इंजीनियरों की टीम ने जेसीबी और मरम्मत सामग्री के साथ मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है।

कहलगांव अनुमंडल प्रशासन के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जब तक पुल के पिलरों और मुख्य ढांचे की आवश्यक मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री प्रभावी रहेगी।

स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों की पहल पर मरम्मत कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि इस लाइफलाइन मार्ग पर दोबारा परिचालन बहाल किया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर