कन्या पूजन से होती है धन-धान्य की प्राप्ति : आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र
सुपौल, 17 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि को घरों एवं मंदिरों में श्रद्धालु विधि-विधान से कुमारी कन्याओं का पूजन करते हैं।
कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके चरण धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है तथा भोजन कराने के बाद उपहार और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन से सुख-समृद्धि, धन-धान्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
पंडित आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि शास्त्रों में अलग-अलग आयु की कन्याओं के पूजन के लिए विशिष्ट नाम और उनके पूजन के अलग-अलग फल बताए गए हैं। कन्या पूजन की यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना से जुड़ी हुई है। आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कन्या को कल्याणी, पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी तथा छह वर्ष की कन्या को कालिका कहा गया है। इसी प्रकार सात वर्ष की कन्या चंडिका, आठ वर्ष की कन्या शांभवी, नौ वर्ष की कन्या दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रचलित शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में एक वर्ष की आयु वाली कन्या को शामिल नहीं करने तथा दस वर्ष से अधिक आयु वाली कन्याओं के पूजन को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मत मिलते हैं।
आचार्य मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुख और दरिद्रता के नाश के लिए कुमारी स्वरूप की पूजा का विधान बताया गया है। त्रिमूर्ति स्वरूप की कन्या के पूजन से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों की प्राप्ति तथा धन-धान्य में वृद्धि की मान्यता है। कल्याणी स्वरूप की पूजा से ऐश्वर्य और यश की प्राप्ति होती है, जबकि कालिका स्वरूप की पूजा शत्रुओं को शांत करने वाली मानी जाती है। इसी प्रकार चंडिका स्वरूप की कन्या के पूजन से विभिन्न सिद्धियों की प्राप्ति, शांभवी स्वरूप की पूजा से संग्राम में विजय तथा दुर्गा स्वरूप की कन्या के पूजन से मनोवांछित फल प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
सुभद्रा स्वरूप की कन्या का पूजन भी शुभ फलदायी माना गया है। आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि नवरात्र में कन्या पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कन्याओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और स्नेह प्रकट करने का अवसर भी है। भक्तों को चाहिए कि वे कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका आदर करें और प्रेमपूर्वक भोजन कराएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया कन्या पूजन भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नवरात्र के अवसर पर विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करने तथा कन्या पूजन के माध्यम से नारी शक्ति के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखने की अपील की।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र