मनाई गई राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती
भागलपुर, 23 सितंबर (हि.स.)। भागलपुर के प्रगति शिक्षण संस्थान, मंदरोजा में बुधवार को 'साहित्य सफर' संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जगतराम साह कर्णपुरी ने की, जबकि उद्घाटन साहित्यकार रंजन कुमार राय ने दिनकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर उपस्थित कवियों और बुद्धिजीवियों ने भी राष्ट्रकवि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्य वक्ता रंजन कुमार राय ने अपने संबोधन में दिनकर जी का भागलपुर से गहरा नाता रेखांकित करते हुए कहा, साठ के दशक में उन्होंने भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में सेवा दी। यह धरती उनकी साहित्यिक साधना भूमि रही है, जहां उन्होंने अपनी प्रसिद्ध काव्य रचना 'हिमालय' की कुछ महत्वपूर्ण पंक्तियां लिखी थीं।
मुख्य अतिथि प्रेम कुमार प्रिय ने दिनकर जी को आधुनिक हिंदी का सशक्त रचनाकार बताते हुए कहा कि वे ओज और राष्ट्रभक्ति के साक्षात कवि थे। उनकी कृतियां जैसे कुरुक्षेत्र, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा और गद्य रचना संस्कृति के चार अध्याय हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।
अपने अध्यक्षीय भाषण में जगतराम साह कर्णपुरी ने कहा कि दिनकर जी आधुनिक काल में वीर रस के बेजोड़ कवि थे। आजादी के पहले वे एक विद्रोही कवि के रूप में उभरे और आजादी के बाद राष्ट्रकवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए। हिंदी साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण, साहित्य अकादमी और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपनी प्रखर लेखनी के कारण वे हमेशा अमर रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर