विद्यालय दुष्कर्म मामले में प्रधानाध्यापक को जमानत, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

 

बक्सर, 23 सितंबर (हि.स.)।

कृष्णा ब्रह्म क्षेत्र के मध्य विद्यालय में छात्रों के साथ कथित दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपित प्रधानाध्यापक को स्थानीय विशेष पॉक्सो न्यायालय से जमानत मिलने के बाद पुलिस की जांच और कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध अभिलेखों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी के आधार पर प्रधानाध्यापक को जमानत प्रदान कर दी। जमानत मिलने की खबर सामने आते ही स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

लोगों का सवाल है कि यदि मामला इतना गंभीर था और पुलिस ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की थी, तो जांच के दौरान ऐसे कौन से ठोस साक्ष्य सामने आए, जिन्हें न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किया जा सका? आखिर पुलिस की केस डायरी में क्या तथ्य दर्ज किए गए थे और किन आधारों पर लगाई गई धाराएं न्यायालय में पर्याप्त नहीं ठहरीं—यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

सबसे बड़ा सवाल पुलिस की जांच को लेकर उठ रहा है। पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामले में पीड़ित बच्चों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य, घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच कितनी गंभीरता से की गई, इसकी पड़ताल जरूरी है। यदि पुलिस के पास आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य थे तो उन्हें केस डायरी में किस तरह प्रस्तुत किया गया और यदि साक्ष्य कमजोर थे तो जांच के स्तर पर कमी कहां रह गई, इसका जवाब भी सामने आना चाहिए।

हालांकि, न्यायालय द्वारा जमानत दिया जाना आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के समान नहीं है। मामले का अंतिम निर्णय साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। लेकिन जमानत के बाद पुलिस की जांच को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे प्रकरण की गंभीरता बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर बच्चों से जुड़े इस प्रकार के आरोप सामने आने के बाद जांच में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए थी। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पुलिस मामले के तथ्यों और साक्ष्यों को किस मजबूती के साथ सामने रखती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Kumar Mishra