आईजीएनसीए में डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्ति और निरंतरता पर सांसद ने किया सवाल
बक्सर , 29 सितंबर (हि.स.)।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्ति एवं निरंतरता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बक्सर राजद सांसद सुधाकर सिंह के द्वारा एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
सांसद ने अपने पूर्व पत्र का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस मामले से जुड़े कुछ अभिलेख और शिकायतें पहले भी प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान में लाई गई थीं। अब उन्होंने संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र रूप से जांच कराने और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। शिकायत में छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) से संबंधित पूर्ववर्ती कार्यवाही का हवाला दिया गया है।
सांसद के अनुसार, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में डॉ. जोशी के तत्कालीन कार्यकाल से जुड़ी कुछ नियुक्ति प्रक्रियाओं पर लोकायुक्त के समक्ष सवाल उठे थे और उपलब्ध अभिलेखों में कार्रवाई की अनुशंसा का उल्लेख है। सांसद ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति एवं निरंतरता के दौरान इन अभिलेखों का कोई सत्यापन या परीक्षण किया गया था या नहीं।
पत्र में आईजीएनसीए से संबंधित महानिदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय व्यय) की निरीक्षण रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2021-22 की अवधि से संबंधित रिपोर्ट में कुछ नियुक्तियों, पात्रता एवं अनुभव के दस्तावेज, शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया तथा वित्तीय और प्रशासनिक मामलों से जुड़ी आपत्तियां दर्ज हैं। श्री सिंह ने इन आपत्तियों पर संबंधित विभाग द्वारा की गई कार्रवाई और जिम्मेदारी तय किए जाने की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। शिकायत में लगभग 6.5 करोड़ रुपये और 10.67 करोड़ रुपये से संबंधित कथित ऑडिट टिप्पणियों का भी उल्लेख है। साथ ही क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना और कुछ नियुक्तियों के लिए आवश्यक मंत्रालयीय स्वीकृतियों से जुड़े अभिलेखों की उपलब्धता की जांच की मांग की गई है। इन मामलों में सांसद ने स्वतंत्र वित्तीय परीक्षण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका निर्धारित करने का अनुरोध किया है।
वाराणसी स्थित गांधी विद्या संस्थान से जुड़े लगभग 60 लाख रुपये के कथित व्यय की भी जांच की मांग की गई है। सुधाकर सिंह ने प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश, बिल, वाउचर और भुगतान संबंधी अभिलेखों के परीक्षण का सुझाव दिया है।
इसके अलावा वाराणसी केंद्र में वर्ष 2024-25 के दौरान हुई पांच नियुक्तियों की आरक्षण रोस्टर, पात्रता, आवेदन, स्क्रीनिंग, साक्षात्कार और चयन प्रक्रिया की पदवार जांच कराने की मांग की गई है। वाराणसी, जम्मू-श्रीनगर, रांची, वडोदरा, गोवा, तिरुवनंतपुरम और पुडुचेरी सहित क्षेत्रीय केंद्रों के पिछले दस वर्षों के प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णयों की भी समीक्षा का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने डॉ. जोशी की नियुक्ति एवं निरंतरता से संबंधित फाइल, सतर्कता सत्यापन तथा निर्णय प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। साथ ही सभी संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखने और जांच में अनियमितता प्रमाणित होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
पत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय से पूर्व शिकायत पर हुई कार्रवाई तथा वर्तमान शिकायत पर प्रस्तावित कदमों की समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों और उठाए गए प्रश्नों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एवं आधिकारिक अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Kumar Mishra