स्कूली बच्चों को दिवस ज्ञान के तहत चाय दिवस पर दी गई चाय की जानकारी
अररिया 21 सितम्बर(हि.स.)।फारबिसगंज प्रखंड के तिरसकुंड पंचायत के प्राथमिक विद्यालय आदिवासी टोला मधुरा में सोमवार को राष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर स्कूली बच्चों को चाय को लेकर जानकारी दी गई।स्कूल प्रधान शिक्षक मिथिलेश कुमार सिंह की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को चाय की खेती,उत्पादन और मार्केटिंग के साथ किशनगंज के कई इलाकों में हो रहे चाय की खेती और बागान के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान शिक्षक मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि हर साल 21 सितंबर को भारत और दुनिया के कई हिस्सों में राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है। यह दिन चाय प्रेमियों के लिए अपनी पसंदीदा मसाला चाय या कड़क चाय का आनंद लेने और इसके सांस्कृतिक महत्व को याद करने का अवसर होता है।
चाय का महत्व और संस्कृति आत्मीयता का प्रतीक भारतीय संस्कृति में घर आए मेहमान का स्वागत अक्सर चाय को लेकर पूछकर किया जाता है। नुक्कड़ की चाय की दुकानें राजनीति, खेल और आम जीवन की बातचीत का प्रमुख केंद्र होती हैं।सुबह की सुस्ती भगाने से लेकर रातभर काम करने वालों की थकान मिटाने के लिए चाय एक बेहतरीन बूस्टर है। लेकिन चाय सीमित मात्रा में ही पीनी चाहिए ताकि उसे कोई नुकसान न हो।
वहीं पूर्व प्रधान कुमार राजीव रंजन ने बताया कि भारत में सबसे बेहतरीन और प्रसिद्ध चाय दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल और असम के बागानों में मिलती है,जहां दुनिया की सबसे सुगंधित और उच्च गुणवत्ता वाली चाय पत्ती पैदा होती है।दार्जिलिंग में उत्पादित चाय को चाय की शैंपेन कहा जाता है। इसकी हल्की हरी और भुनी हुई पत्तियों की खुशबू बेहद शानदार होती है।वहीं आसाम में होने वाला चाय अपनी कड़क और गाढ़े रंग की चाय के लिए जानी जाती है, जो सुबह की ताजगी के लिए बेहतरीन है।उन्होंने बताया कि ग्लोबल रैंकिंग में भारतीय मसाला चाय को दुनिया में पहला स्थान मिला है, जो हर गली-नुक्कड़ पर सोंधी खुशबू के साथ मिलती है।
मौके पर बच्चों ने मानव श्रृंखला का भी निर्माण किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर