टीएमबीयू में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की तैयारियाँ तेज, विभागीय बैठक में बनी रणनीति

 

भागलपुर, 24 अक्टूबर (हि.स.)। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग में आगामी 27 एवं 28 नवंबर को आयोजित होने वाले दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की तैयारियों को लेकर शनिवार को विभाग में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य विषय भारतीय ज्ञान परंपरा और सतत विकास लक्ष्य-4: एक वैश्विक विमर्श निर्धारित किया गया है।

बैठक की अध्यक्षता एवं सेमिनार के संयोजन का दायित्व निभा रहीं प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी पांडेय ने किया। उनके कुशल नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में सेमिनार की आयोजन सचिव डॉ. सपना समेत विभिन्न विभागों के सम्मानित शिक्षक और विद्वान मौजूद रहे। बैठक में कार्यक्रम को सफल, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों, अतिथियों के स्वागत और विभिन्न सत्रों की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ एवं युवा प्राध्यापक शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से प्रो. दयानंद राय, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. सुमन कुमार, डॉ. रविशंकर कुमार चौधरी, डॉ. राहुल, डॉ. संजय कुमार जायसवाल, डॉ. श्वेता पाठक, डॉ. जनक श्रीवास्तव, डॉ. अंशुमान सुमन, डॉ. विवेक कुमार हिंद उपस्थित रहे। बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा की गई कि किस तरह भारतीय ज्ञान परंपरा और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) के अंतर्संबंधों को वैश्विक शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य में मजबूती से प्रस्तुत किया जाए।

इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित शैक्षणिक, नैतिक, सांस्कृतिक एवं मानवीय मूल्यों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। साथ ही, समावेशी, समानतापूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए देश-विदेश के विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। यह भव्य आयोजन शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ वैश्विक शैक्षणिक चुनौतियों पर मंथन करने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करेगा।

विभागीय स्तर पर सेमिनार को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियाँ की जा रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि इस आयोजन से क्षेत्र में शैक्षणिक व शोध गतिविधियों को भारी प्रोत्साहन मिलेगा और वैश्विक पटल पर भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को एक नई पहचान मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर