भारतीय संस्कृति में लोक कलाओं का बदलता स्वरुप विषय पर दो-दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित
भागलपुर, 28 मार्च (हि.स.)। एसएम कॉलेज भागलपुर में भारतीय संस्कृति में लोक कलाओं का बदलता स्वरुप विषय पर आयोजित दो-दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार का उदघाटन शनिवार को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. बिमलेन्दु शेखर झा ने दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त अवनीश कुमार सिंह थे।
अपने अध्यक्षयीय सम्बोधन में कुलपति प्रो. बिमलेन्दु शेखर झा ने कहा भारतीय संस्कृति में लोक कलाएँ (फोक आर्ट्स) हमेशा से समाज के जीवन, परंपराओं और मान्यताओं का जीवंत दर्पण रही हैं। हालांकि समय के साथ इनका स्वरूप लगातार बदलता रहा है। आज के दौर में यह बदलाव और भी तेजी से दिखाई देता है। भारतीय लोक कलाएँ आज परंपरा और आधुनिकता के संगम पर खड़ी हैं। उनका स्वरूप बदल जरूर रहा है, लेकिन उनकी आत्मा अभी भी भारतीय संस्कृति से काफी गहराई के साथ जुड़ी हुई है। जरूरत है कि हम इन कलाओं को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक समय के साथ आगे बढ़ने का अवसर दें।
उन्होंने कहा की भारतीय लोक कला देश की समृद्ध परंपरा और समाज का जीवंत दस्तावेज है। यह हमारी सांस्कृतिक पहचान है। वीसी ने सेमिनार के विषय वस्तु की काफी सराहना की और आयोजकों को बधाई दिए। मुख्य अतिथि भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त अवनीश कुमार सिंह ने कहा की सेमिनार का विषय काफी समसामयिक और रोचक है। लोक कलाओं को संरक्षित रखने के लिए इसे आम लोगों से जोड़ना होगा। जनता से जुड़ाव जरुरी है। भारत को आज जो विश्व गुरु बनाने का सपना है, उसमें नॉलेज का बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा की सेमिनार से निकले निष्कर्ष समाज के लिए काफी उपयोगी साबित होंगे। एसएम कॉलेज की प्राचार्या और सेमिनार की कन्वेनर प्रो. निशा झा ने सेमिनार का विषय प्रवेश कराया। उन्होंने पारम्परिक संगीत से सबों को अवगत कराया, साथ ही लोक संगीत का वर्गीकरण पेश की। इसके पूर्व कुलपति, आयुक्त सहित अन्य आगंतुक अतिथियों का सम्मान अंग वस्त्र भेंट कर किया गया। संगीत विभाग की छात्राओं ने कुलगीत और वेदगान की प्रस्तुति दी। पुष्प वर्षा से अतिथियों का स्वागत किया गया। धन्यवाद ज्ञापन सेमिनार की आयोजन सचिव ने किया। अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में यूएसए, श्रीलंका, मॉरीशस सहित भारत के कई राज्यों के विश्वविद्यालयों के विषय विशेषज्ञ और शिक्षाविद ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में भाग ले रहे हैं।
उदघाटन सत्र के दौरान सोविनयर का भी विमोचन किया गया। सेमिनार के पहले प्लेनरी बौद्धिक सत्र में नेपाल के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की एचओडी डॉ. श्वेता दीप्ती ने भारतीय संस्कृति में लोक कला का महत्व विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं संस्कार भारती जौनपुर से आयीं डॉ. ज्योति सिन्हा ने भोजपुरी के संदर्भ में भारतीय संस्कृति और लोक गीत, मगध विश्वविद्यालय के डॉ. नीरज कुमार ने भारतीय साहित्य में लोक संस्कृति सिक्किम यूनिवर्सिटी के डॉ. संतोष कुमार ने पूर्वोत्तर भारत में सुषिर वाद्य परम्परा और संस्कृति, प्रयागराज की मधुरानी शुक्ला ने भारतीय लिखा संस्कृति पर अपने विचार रखे। सेमिनार में सभी संकायों और विषयों के शिक्षक और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर