भागलपुर में मां विषहरी की प्रतिमाओं की विसर्जन का सिलसिला शुरू, सुरक्षा के कड़े प्रबंध

 


भागलपुर, 19 अगस्त (हि.स.)। अंग जनपद की अधिष्ठात्री देवी मां मनसा विषहरी की तीन दिवसीय भव्य पूजा का समापन बुधवार को पारंपरिक श्रद्धा, उल्लास और नम आंखों के साथ प्रतिमा विसर्जन के साथ हो रहा है। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों से गाजे-बाजे और पारंपरिक मंजूषा कला की अद्भुत झांकियों के साथ मां विषहरी की विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हैं। केंद्रीय विषहरी पूजा समिति और जिला प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष शहर में 116 से अधिक स्थानों पर मां विषहरी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। आज दोपहर बाद 4 बजे से ही सभी विसर्जन समितियां अपनी-अपनी प्रतिमाओं के साथ मुख्य विसर्जन मार्ग पर जुटने लगीं। शाम होते-होते शोभायात्रा ने एक विशाल जनसैलाब का रूप ले लिया।

विसर्जन यात्रा में सती बिहुला, बाला लखेंद्र, चांदो सौदागर और नाग मणियार सहित मंजूषा कला से प्रेरित 25 देवी-देवताओं की जीवंत झांकियां आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। प्रशासन द्वारा तय किए गए रूट के अनुसार, भागलपुर शहरी क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन मुख्य रूप से मुसहरी घाट, बरारी घाट, नाथनगर के चम्पानाला पुल और मोजाहिदपुर के छत्रपति तालाब में किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों और नवगछिया क्षेत्र की प्रतिमाओं को भी स्थानीय विसर्जन घाटों और गोपाल गौशाला तालाब में विसर्जित किया जा रहा है। विसर्जन यात्रा को सुगम बनाने के लिए भागलपुर नगर निगम द्वारा मुसहरी घाट और अन्य विसर्जन स्थलों पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भव्य पंडाल और पर्याप्त दूधिया रोशनी का प्रबंध किया गया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों का पालन करते हुए नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष विसर्जन तालाबों की सफाई कर उनमें पानी भरा गया है। शोभायात्रा के रास्ते में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए निगम की टीम ने सोमवार से ही विसर्जन रूट से अस्थाई अतिक्रमण हटाने का काम पूरा कर लिया था। मेला क्षेत्र और विसर्जन मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन बेहद मुस्तैद है। उपद्रवियों और अफवाह फैलाने वालों पर नज़र रखने के लिए पूरे विसर्जन मार्ग को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है।

जिला प्रशासन के संयुक्त आदेश के मुताबिक, केवल लाइसेंसधारी पूजा समितियों को ही विसर्जन शोभायात्रा निकालने की अनुमति दी गई है। भारी पुलिस बल के साथ-साथ मुसहरी घाट और गंगा घाटों पर गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम को भी तैनात किया गया है। अंग क्षेत्र की यह सदियों पुरानी लोक परंपरा सती बिहुला के अटूट पतिव्रत धर्म और मां मनसा विषहरी की महत्ता को दर्शाती है। विसर्जन के दौरान महिलाएं पारंपरिक विदाई गीत और खोइछा भरकर मां को विदा कर रही हैं। मां विषहरी मैया की जय और सती बिहुला की जय के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है। देर रात तक शांतिपूर्ण तरीके से सभी प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी घाटों पर कैंप कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर