विश्व विरासत दिवस पर स्कूली बच्चों ने बनाया मानव श्रृंखला
अररिया 18 अप्रैल(हि.स.)।फारबिसगंज के तिरसकुंड पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय आदिवासी टोला मधुरा में बच्चों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरासत बचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक कुमार राजीव रंजन ने कहा कि 18 अप्रैल को हर साल विश्व विरासत दिवस या अंतर्राष्ट्रीय धरोहर दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उनके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। 2026 की थीम संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया है, जो संकट के समय धरोहरों की सुरक्षा पर जोर देती है।
विश्व विरासत दिवस की मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासतों के संरक्षण के तरीकों को बढ़ावा देना और जागरूकता फैलाना है।भारत में 43 विश्व धरोहर स्थल हैं,जिनमें ताजमहल, कोणार्क सूर्य मंदिर और अजंता की गुफाएं शामिल हैं। यह दिन हमें ऐतिहासिक स्थलों को प्रदूषण, शहरीकरण और लापरवाही से बचाने के लिए प्रेरित करता है। पहला 'विश्व विरासत दिवस' 18 अप्रैल, 1982 को ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स द्वारा मनाया गया था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान शिक्षक मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि आने वाले समय में धूप और गर्मी की वजह से लू लगने की संभावना है, अतः धूप में जाने से बेवजह बचें साथ ही साथ विशेष आवश्यकता पड़ने पर मोटा तौलिया सर पर रखकर छाता एवं पानी की बोतल साथ में रखे। वहीं कक्षा प्रथम से पंचम तक के बच्चों को विभाग द्वारा उपलब्ध पाठ्य-पुस्तक डायरी अभिभावकों के साथ दिया गया। इस अवसर पर सैकड़ों बच्चे तथा दर्जनों अभिभावक उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर