गंगा का कहर, बाढ़ पीड़ितों को स्कूल में शरण लेने से रोका, जमकर हुआ हंगामा

 


भागलपुर, 04 सितंबर (हि.स.)। गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की विभीषिका के बीच शुक्रवार सुबह टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल परिसर में उस समय भारी तनाव का माहौल बन गया, जब बाढ़ से प्रभावित करीब 50 से 60 लोग शरण लेने पहुँचे।

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें स्कूल परिसर से बाहर जाने के लिए कहा जाने लगा, जिसके बाद मौके पर काफी देर तक तीखी बहस और गहमागहमी की स्थिति बनी रही।

बाढ़ पीड़ितों ने रोष जताते हुए कहा कि यह उनके लिए कोई नया ठिकाना नहीं है। पिछले करीब 25 वर्षों से जब भी उनके घरों में बाढ़ का पानी घुसता है, वे इसी स्कूल परिसर में आकर अस्थायी रूप से आसरा लेते रहे हैं।

इस बार भी घरों में घुटने भर पानी भर जाने के बाद वे अपने परिवार, मवेशियों और जरूरी सामान के साथ स्कूल पहुँचे थे। पीड़ितों के मुताबिक, स्कूल में निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार की ओर से उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा जाने लगा, जिसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

बेबस लोगों ने सवाल उठाया कि जब रहने की कोई जगह नहीं बची है, तो आपदा की इस घड़ी में वे अपना परिवार लेकर आखिर कहाँ जाएँ? स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय प्रबुद्ध लोगों और जिम्मेदार नागरिकों ने बातचीत के जरिए मामले को शांत कराने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद ठेकेदार की ओर से लिखित सहमति दी गई और बाढ़ पीड़ितों को वहीं रहने की अनुमति मिली।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक घरों से पानी नहीं निकल जाता, तब तक पीड़ितों को यहीं रहने दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन परिवारों के लिए रहने, खाने-पीने और चिकित्सीय सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाएं।

प्रशासन के स्तर से मिले आश्वासन के बाद मौके पर बना तनाव धीरे-धीरे शांत हुआ। यह पूरा घटनाक्रम आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब बाढ़ किसी परिवार का आशियाना छीन लेती है, तो राहत शिविर ही उनका आखिरी सहारा होते हैं।

ऐसे में आश्रय स्थलों पर भी अगर इस तरह का विवाद खड़ा होगा, तो बेबस पीड़ित दोहरी मार झेलने को मजबूर हो जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर