किसानों को खेती से जुड़ी तकनीकों की जानकारी के लिए 21 से 23 मार्च के दौरान ग्रीन-टेक कॉनक्लेव
पटना, 19 मार्च (हि.स.)।
बिहार के किसानों को बागवानी और उन्नत खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मुहैया कराई जाएगी। बिहार में पहली बार ‘बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव-2026’ का आयोजन 21 से 23 मार्च के बीच आयोजित होने जा रहा है। यह जानकारी कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन स्थित अपने कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।
रामकृपाल यादव ने गुरुवार को कहा कि नर्सरी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक अपनाकर अधिक ऊपज प्राप्त करने से संबंधित कई तरीके किसानों को इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान बताए जाएंगे। यहां राष्ट्रीय और बिहार पैवेलियन में कृषि को उन्नत बनाने को लेकर हो रहे नए प्रयोगों को बताया जाएगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के 8 संस्थान और बिहार में प्रगतिशील तकनीक के आधार पर खेती करने वाले 12 से अधिक लोग शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में चाणक्या हॉर्टि-पिच नाम से एक अलग पैवेलियन होगा, जिसमें कृषि के क्षेत्र में बेहतरीन स्टार्ट-अप करने वालों को मौका दिया जाएगा। इनके उन्नत प्रयोगों से किसानों को खेती एवं बागवानी में नए प्रयोगों के बारे में जानकारी मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि बिहार की 76 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में किसानों की आमदनी को लगातार बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। नई तकनीक की मदद से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के तरीके किसानों को बताए जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सपना हर किसी की थाली में बिहार का व्यंजन पहुंचाने का है। यह सपना पूरा भी हो रहा है, लेकिन अब इससे आगे विदेशों तक बिहार के व्यंजन और कृषि उत्पादों को पहुंचाने की मुहिम में विभाग जुटा है। मुजफ्फरपुर की लीची, भागलपुर का जर्दालू आम, मखाना समेत अन्य कई उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इससे इन्हें वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है।
कृषि मंत्री ने कहा कि मखाना विकास बोर्ड का कार्यालय दरभंगा या मुजफ्फरपुर में खोला जाएगा। इसके लिए स्थान चिन्हित किए जा रहे हैं। हालांकि इसका मुख्यालय कहां होगा, यह केंद्र तय करेगा। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के अलावा वियतनाम, मलेशिया समेत दूसरे कई देशों में मखाना की काफी मांग है। देश में मखाना के कुल उत्पादन का 70 से 80 फीसदी हिस्सा बिहार में होता है। मंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस सुपरफूड को दुनिया तक पहुंचाने में उनका विशेष योगदान है। मखाना बोर्ड के गठन से इसका विकास होगा। इसकी खेती करने वाले किसानों को तकनीकी सामान भी दे रहे हैं, ताकि उन्हें इसमें तकलीफ नहीं हो।
मंत्री ने कहा कि बिहार में लीची की उन्नत प्रोसेसिंग इकाई लगाने पर विचार हो रहा है। इसे पीपीपी मोड पर लगाया जाएगा, ताकि लीची की पैकेजिंग सही तरीके से हो सके और इसे लंबे समय तक फ्रेश बनाए रखने में मदद मिले। इसकी पैकेजिंग यूनिट लगाने वाली इकाईयों को बिहार इंडस्ट्रियल प्रोमोशन पॉलिसी के तहत उचित सब्सिडी भी दी जाएगी। वर्तमान तकनीक के आधार पर लीची का सेल्फलाइन 30 दिन तक किया गया है। मेडागास्कर देश ने एक ऐसी तकनीक का इजात किया है, जिससे लीची की सेल्फलाइफ बढ़कर 45 दिन हो गई है। इस तकनीक को आयात करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। ताकि इसे अपनाकर बिहार के किसानों को भी लाभ दिलाई जा सके। ऐसे यहां के वैज्ञानिक भी लगातार इस विषय पर शोध कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी