गीता भारतीय ज्ञान परंपरा का बीज-कोश : डॉ. रुद्रकांत अमर

 


दरभंगा, 30 सितंबर (हि.स.)। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में ‘श्रीमद्भगवद्गीता में भारतीय ज्ञान परंपरा के बीज तत्त्व’ विषय पर एकल व्याख्यान आयोजित किया गया। अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. शिखर वासिनी ने की। मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रुद्रकांत अमर एवं सम्मानित अतिथि पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शिवानंद झा रहे।

मुख्य वक्ता डॉ. रुद्रकांत अमर ने आत्मा की नित्यता, स्थितप्रज्ञता, निष्काम कर्म, ज्ञान-कर्म-भक्ति के समन्वय एवं समत्व-योग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता किसी एक दर्शन की पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का बीज-कोश है। इसमें उपनिषदों की आत्मविद्या, सांख्य का तत्त्वविवेक, योग की समत्व-दृष्टि और कर्म की लोकोपयोगिता का समन्वय है।

डॉ. शिवानंद झा ने कहा कि ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि जीवन जीने की दृष्टि है। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शिखर वासिनी ने कहा कि दर्शन का उद्देश्य विचार को जीवन में उतारना है। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम्, राष्ट्रगान एवं कुलगीत के गायन और दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों का पाग-चादर से अभिनंदन किया गया। स्वागत भाषण डॉ. प्रियंका राय, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजीव कुमार साह एवं मंच संचालन ईशान कुमार ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra