गर्भवती महिलाओ को प्रसव पूर्व चार बार एएनसी जांच कराना जरूरी

 




-गर्भवस्था के दौरान उच्च जोखिम से बचाव को लेकर सतर्क रहें महिलाएँ

पूर्वी चंपारण,10 जून(हि.स.)। जिले में मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने व सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्धारा लगातार जागरूकता फैलायी जा रही है।इसको लेकर हर माह में 9 तारीख एवं 21 तारीख को राज्य के सभी जिला अस्पताल, अनुमण्डलीय अस्पताल एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं के एएनसी जांच की जा रहीं है। ताकि गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य जांच कराकर गर्भवस्था के दौरान उच्च जोखिम से बच सकें।

जिले के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रवण कुमार पासवान ने कहा की जिले की गर्भवती महिलाएं भी अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग दिख रहीं है। जिससे जिला में मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी देखने को मिल रही है। डीसीएम नंदन झा ने बताया की आशा कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी की सेविकाएं घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल जाकर जाँच व इलाज के लिए प्रेरित कर रही हैं ताकि प्रसव के पूर्व संभावित जटिलताओ का पता चल सकें। उन्होने बताया कि गर्भावस्था की संपूर्ण अवधि के दौरान कम से कम चार बार एएनसी जांच जरूरी है।

हीमोग्लोबिन,खून में ग्लूकोज की मात्रा, ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर, एचआई वी आदि की जांच शामिल है। सदर अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ सुरुचि कुमारी ने बताया की गर्भवती महिलाओं को पहली जांच गर्भधारण के 12वें सप्ताह तक, दूसरी जांच 14वें से 26वें सप्ताह तक, तीसरी 28वें से 32वें सप्ताह तक और अंतिम जांच 34वें से प्रसव होने से पहले तक करा लेनी चाहिए।गर्भवती महिलाओं को सन्तुलित आहार के साथ आयरन एवं कैल्शियम की गोली का उचित मात्रा में सेवन करना जरूरी है तभी गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का उचित शारीरिक व मानसिक विकास होता है।उन्होने गर्भवती महिलाओ को

संतुलित आहार,डाइट में विटामिन शामिल करने पर जोर देते कहा कि गर्भावस्था के दौरान तले एवं वसायुक्त व मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए।इस दौरान गर्भवती महिलाओ को मानसिक तनाव से दूर रहकर सुबह-शाम टहलने के साथ हल्का व्यायाम जरूर करें।

हिन्दुस्थान समाचार/आनंद प्रकाश/चंदा