बदहाली के आंसू रो रहा भागलपुर का गंगटा पोखर, जलकुंभी और प्रदूषण ने छीना अस्तित्व
भागलपुर, 29 जुलाई (हि.स.)। जिले के लोदीपुर थाना क्षेत्र स्थित गंगटा पोखर आज प्रशासनिक उपेक्षा, प्रदूषण और जलकुंभी के जाल में फंसकर अपना मूल स्वरूप खो चुका है। कभी इस क्षेत्र की जीवनदायिनी और जल संचयन का मुख्य स्रोत रहा यह तालाब अब एक बदबूदार डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गया है।
तालाब का पानी काला पड़ चुका है और जलीय जीवन पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर है। पोखर की सतह पर जलकुंभी इस कदर फैल चुकी है कि पानी का दिखना भी बंद हो गया है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो रही है। आस-पास के मोहल्लों का कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक कचरा सीधे इस ऐतिहासिक धरोहर में फेंका जा रहा है। पानी पूरी तरह जहरीला हो चुका है। यह पोखर स्थानीय धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है। हर साल दुर्गा पूजा, काली पूजा और अन्य त्योहारों के बाद मूर्तियों का विसर्जन इसी गंगटा पोखर में किया जाता है। मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रंग, जहरीले रसायन और पीओपी पानी में घुलकर इसके प्रदूषण स्तर को कंक्रीट की तरह बढ़ा देते हैं। विसर्जन के बाद मूर्तियों के ढांचे, बांस-बल्ले और सजावट की सामग्रियां महीनों तक पानी में सड़ती रहती हैं। छठ महापर्व के समय जब जिला प्रशासन सुध नहीं लेता, तब स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता खुद चंदा जमा कर और श्रमदान करके इस पोखर से मूर्तियों के अवशेषों की सफाई करते हैं ताकि लोग अर्घ्य दे सकें। इस बदहाली के बीच अच्छी खबर यह है कि बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भागलपुर के जल निकायों को बचाने के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है।
भागलपुर के 24 चुनिंदा तालाबों की जीर्णोद्धार सूची में गंगटा पोखर को भी शामिल किया गया है। बिहार सरकार की नई पहल और इन्वेस्टर मीट के तहत इसे ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की योजना है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कागजी योजनाओं से इतर धरातल पर जल्द से जल्द काम शुरू होना चाहिए। एनजीटी के नियमों के तहत विसर्जन के लिए अलग से कृत्रिम तालाब बनाया जाए ताकि गंगटा पोखर के पानी को हमेशा के लिए स्वच्छ रखा जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर