भारत की एकता और अखंडता की बुनियाद प्रेम, समानता और आपसी भाईचारा है : सैयद शाह फखरे आलम हसन
भागलपुर, 31 अगस्त (हि.स.)।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा अमेरिका में दिए गए उस वक्तव्य का, जिसमें उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति यह चाहता है कि हिंदुस्तान में मुसलमान न रहें, संभव है कि वह हिंदू ही न हो, खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादा नशीन सैयद शाह फखरे आलम हसन ने स्वागत करते हुए इसे देश की एकता, अखंडता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने वाला वक्तव्य बताया है।
सज्जादानशीन ने कहा कि मोहन भागवत का यह विचार कि समस्त मानव एक ही माता-पिता की संतान हैं, मानवता की मूल भावना से जुड़ा हुआ है। इस्लाम भी यही शिक्षा देता है कि पूरी मानव जाति हज़रत आदम और हज़रत हव्वा की संतान है। सभी इंसानों का मालिक, खालिक और परवरदिगार एक ही है। वही इस सृष्टि और संपूर्ण कायनात का रचयिता है। जीवन और मृत्यु उसी के अधिकार में हैं और संसार की प्रत्येक वस्तु उसी की व्यवस्था के अधीन है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक धर्म की बुनियाद यही है कि इंसान अपने सृष्टिकर्ता को पहचाने और उसकी पैदा की हुई पूरी मानवता से प्रेम और करुणा का व्यवहार करे। धर्म और मजहब की वास्तविक आत्मा इंसानों को बांटना नहीं, बल्कि उन्हें प्रेम, भाईचारे और इंसानियत के रिश्ते में जोड़ना है। सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि सभी मनुष्य समान हैं। किसी व्यक्ति को जाति, नस्ल, भाषा, क्षेत्र अथवा धर्म के आधार पर स्वयं को दूसरे से श्रेष्ठ समझने का अधिकार नहीं है। इस्लाम की शिक्षा भी स्पष्ट है कि ईश्वर की दृष्टि में श्रेष्ठता का आधार धन, वंश या सामाजिक हैसियत नहीं, बल्कि तक़वा, परहेज़गारी, ईश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और मानवता के प्रति अच्छा व्यवहार है।
उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ इंसान वही है जो अपने मालिक की आज्ञा का पालन करे और उसकी बनाई हुई मानवता से प्रेम करे। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत की ओर से इस प्रकार का वक्तव्य आना एक अच्छी और स्वागतयोग्य पहल है। आज आवश्यकता है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक, राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक पदों पर आसीन व्यक्तित्वों की ओर से भी लगातार ऐसे संदेश सामने आएं, जिनसे देशवासियों में यह विश्वास मजबूत हो कि हम सब एक हैं, हम सब भारतवासी एक परिवार हैं और भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राष्ट्रीय नेताओं, धर्माचार्यों, उलेमा तथा हिंदू, मुस्लिम और अन्य सभी धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के प्रमुख नेतृत्व की जुबान से प्रेम, सद्भाव, करुणा, भाईचारे और परस्पर सम्मान की बातें जितनी अधिक सामने आएंगी, देश का सामाजिक ताना-बाना उतना ही मजबूत होगा। सज्जादा नशीन ने कहा, “भारत की आंतरिक शक्ति उसकी एकता और अखंडता में है। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और अन्य सभी धर्मों एवं समुदायों के लोगों की समान भागीदारी है। जब हम सब एक परिवार की तरह मिलकर देश की उन्नति के लिए कार्य करेंगे, तभी भारत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और विश्वगुरु बनने का उसका संकल्प वास्तविक रूप से साकार होगा।” उन्होंने कहा कि खानकाह पीर दमड़िया शाह की ओर से श्री मोहन भागवत जी के इस सद्भावपूर्ण वक्तव्य का भरपूर स्वागत किया जाता है। साथ ही उनसे अपेक्षा है कि वे भारत लौटने के बाद भी अपने इस संदेश पर दृढ़तापूर्वक कायम रहते हुए इसे और आगे बढ़ाएं तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर