धर्म लोक परंपरा और लोकाचार से भी चलती है :आचार्य शांतनु अग्निहोत्री
अररिया 21 अक्टूबर(हि.स.)।
अधर्म पर धर्म और विजय का पर्व है विजयादशमी।रावण दहन विजयादशमी के साथ एकादशी के दिन भी होता आ रहा है। उत्तरप्रदेश के मैनपुरी सहित पंजाब के फतेहगढ़ सहित कई जिलों और गांवों में एकादशी के दिन रावण दहन का कार्यक्रम किया जाता रहा है।उक्त बातें श्री रामनवमी पूजा समिति के द्वारा आयोजित फारबिसगंज के हवाई अड्डा मैदान में एकादशी के दिन गुरुवार को होने वाले रावण दहन को लेकर बनारस के आचार्य शांतनु अग्निहोत्री ने बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि मामले को लेकर उन्होंने अपने गुरु और अन्य आचार्यों से जानकारी प्राप्त की है।आचार्य शांतनु अग्निहोत्री ने कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाती है,न कि तोड़ना और फिर विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म के विजय का प्रतीक है।जिसमें सभी सनातनियों का सहयोग आवश्यक है।उन्होंने कहा कि धर्म धार्मिक ग्रन्थों के साथ लोक परंपरा,मान्यता और लोकाचार से भी चलती है।ऐसे में सर्वजन की सहमति और सकारात्मक सहयोग जरूरी है।
दरअसल एकादशी के दिन रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने को लेकर एक वर्ग द्वारा सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा था,जिसको लेकर आयोजन समिति के द्वारा बुधवार को रावण दहन स्थल पर प्रेस कांफ्रेंस कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया और सभी से सहयोग की अपील की गई।आचार्य शांतनु अग्निहोत्री ने कहा कि मत,भ्रम को लेकर मान्यता और परंपरा आधार है और इस बहाने धर्म संस्कृति के तहत समाज को जोड़ने की दिशा में पहल की जाय।
आचार्य शांतनु अग्निहोत्री ने कहा कि उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में एकादशी के दिन रावण दहन की परम्परा करीब दो सौ साल पुरानी परंपरा है, जहां महाराज तेज सिंह जूदेव की सवारी और श्रीराम के पूजन के बाद एकादशी तिथि को रावण का वध किया जाता है। कुरावली, बेवर और भोगांव में भी अलग-अलग तिथियों पर यह आयोजन होता है।छत्तीसगढ़ के चन्द्रखुरी और पंजाब के फतेहगढ़ में भी एकादशी के दिन आयोजन होता आ रहा है।
मौके पर बनारस के आचार्य शांतनु अग्निहोत्री, वीरेंद्र प्रसाद उर्फ मिंटू,डिम्पल चौधरी, राजू साह,प्रेम केशरी, करण सिंह,उमाशंकर उर्फ बुलबुल यादव, आशुतोष पराशर, कार्तिक सिंह,मुनचुन मिश्रा,रविशंकर यादव,गौरव चौधरी,अंकित कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर