विश्वविद्यालय, हॉस्टल और कॉलोनियां जलमग्न, विस्थापितों का हंगामा

 




भागलपुर, 04 सितंबर (हि.स.)। जिले में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर लगातार बढ़ रहा है, जिससे शहर के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है।

बाढ़ का पानी अब न केवल ग्रामीण क्षेत्रों बल्कि शहर के मुख्य शैक्षणिक और आवासीय परिसरों में भी तेजी से प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर (कहलगांव में 32.14 मीटर और सुलतानगंज-नाथनगर के क्षेत्रों में उफान पर) दर्ज किया गया है और इसमें लगातार वृद्धि की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

वहीं बाढ़ से विस्थापित हुए सैकड़ों लोग राहत की आस में मवेशियों और अपने सामान के साथ टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल परिसर पहुंचे। हालांकि, जगह की कमी और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर अंचलाधिकारी और नगर निगम के कर्मचारियों ने उन्हें स्कूल के भीतर रुकने से मना कर दिया और रोकने का प्रयास किया।

प्रशासन के इस रुख से नाराज होकर बाढ़ विस्थापितों ने टीएनबी कॉलेजिएट मैदान में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। विस्थापितों का कहना है कि उनके घर पूरी तरह डूब चुके हैं और इस संकट की घड़ी में प्रशासन उन्हें आसरा देने के बजाय खदेड़ रहा है। उधर बाढ़ का पानी शहर के लालबाग स्थित गर्ल्स हॉस्टल के कमरों तक पहुंच गया है। प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल को तुरंत खाली करने का सख्त आदेश दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई छात्राओं ने अभी तक हॉस्टल खाली नहीं किया है।

हॉस्टल वार्डन और स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में हॉस्टल में मात्र चार लड़कियां बची हुई हैं, जो बाढ़ के बढ़ते खतरे के बाद भी परिसर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अधिकारी उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए लगातार समझाने का प्रयास कर रहे हैं। बाढ़ के पानी ने शहर के सबसे पॉश और शैक्षणिक क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है, जिससे प्रशासनिक कार्य ठप होने की कगार पर हैं। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय से सटी प्रोफेसर कॉलोनी के घरों में तीन से चार फीट तक पानी घुस गया है। सड़कों पर नावें चलने जैसी स्थिति पैदा हो गई है और पूरी कॉलोनी टापू में तब्दील हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि भागलपुर शहर और आसपास के घाटों पर गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है। कहलगांव स्टेशन: गंगा का वर्तमान जलस्तर 32.14 मीटर रिकॉर्ड किया गया है, जो खतरे के निशान (31.09 मीटर) से 1.05 मीटर ऊपर है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, जलस्तर में अभी और बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे स्थिति अगले 24 से 48 घंटों में अधिक संवेदनशील हो सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाढ़ आने के बावजूद नगर निगम और जिला प्रशासन की तैयारियां अधूरी हैं। न तो पर्याप्त राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है और न ही विस्थापितों के लिए चारे और भोजन का उचित प्रबंध है। स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने और संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने का निर्देश दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर