जलप्रलय के बीच मातृत्व सुरक्षा का पहरा: बोट एम्बुलेंस से 1700 का उपचार, 453 गर्भवती महिलाओं पर विशेष नजर

 


कटिहार, 09 सितंबर (हि.स.)। जिले में बाढ़ के कारण सड़क संपर्क टूटने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में मोर्चा संभालते हुए बोट क्लीनिक और बोट एम्बुलेंस के जरिए चिकित्सा सेवा पहुंचानी शुरू कर दी है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा ने बुधवार को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर मेडिकल कैंपों और बोट क्लीनिकों का निरीक्षण किया तथा विभाग के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। जिले के कुरसेला, अहमदाबाद, मनिहारी और बरारी प्रखंडों में चार विशेष बोट क्लीनिक और 24 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से जलमग्न इलाकों तक दवाएं व स्वास्थ्यकर्मी पहुंचाकर अब तक 1,700 से अधिक पीड़ितों का इलाज किया जा चुका है।

आपदा के बीच गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी स्वास्थ्य विभाग की शीर्ष प्राथमिकता बनी हुई है। सितंबर और अक्टूबर माह में संभावित प्रसव के मद्देनजर विभाग ने आजमनगर में 165, बलरामपुर में 149, बरारी में 110 और अहमदाबाद में 29 गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कर उन्हें विशेष निगरानी में रखा है। जमीनी स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि प्रसव की संभावित तिथि से पहले ही इन महिलाओं को सुरक्षित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया जाए, ताकि संस्थागत प्रसव कराया जा सके। इसी क्रम में बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जिले भर में करीब 2,000 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई, जिसमें गंभीर एनीमिया से पीड़ित 21 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस से केंद्र लाकर एफसीएम इंजेक्शन दिया गया।

बाढ़ जनित बीमारियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सर्पदंश व एंटी-रेबीज इंजेक्शन के साथ-साथ ब्लीचिंग पाउडर और हैलोजन टैबलेट का व्यापक वितरण किया जा रहा है। पीएचईडी के समन्वय से चापाकलों के शुद्धिकरण का कार्य जारी है, वहीं आशा कार्यकर्ता ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने और बासी भोजन न करने को लेकर जागरूक कर रही हैं। जिला प्रशासन विषम परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने और अंतिम व्यक्ति तक उपचार पहुंचाने के संकल्प के साथ पूरी तरह सक्रिय है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह