जलजमाव वाले चौर क्षेत्रों में मत्स्य पालन की संभावनाएं तलाशेगा प्रशासन

 


सुपौल, 15 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में मत्स्य संसाधनों के विकास और मछली पालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है। इसी क्रम में बुधवार को उप विकास आयुक्त इंद्रवीर कुमार ने सरायगढ़ प्रखंड अंतर्गत इटहरी राजस्व मौजा में स्थानीय किसानों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में क्षेत्र में लंबे समय से जलजमाव की समस्या से प्रभावित भूमि को मत्स्य पालन के उपयोग में लाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में डीडीसी ने कहा कि सुपौल जिले में मत्स्य विकास की अपार संभावनाएं हैं। जिले के कई क्षेत्रों में सालों भर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। ऐसे क्षेत्रों को उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित कर मछली पालन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे जलजमाव वाले क्षेत्रों का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ स्थानीय किसानों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों से इस दिशा में सहयोग करने की अपील की। इस दौरान इटहरी के किसानों ने सरकार की ओर से जलप्लावित चौर क्षेत्रों के विकास के लिए योजना तैयार किए जाने पर सहमति जताई। जनप्रतिनिधियों ने भी जलजमाव वाले क्षेत्रों को मत्स्य संसाधन के रूप में विकसित करने के संबंध में अपने विचार रखे और क्षेत्र के विकास में सहयोग देने की बात कही। डीडीसी ने बताया कि योजना को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले अंचल कार्यालय के माध्यम से अमीन द्वारा जलजमाव वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर उनकी सीमाओं का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद संबंधित किसानों से बातचीत की जाएगी और उनकी सहमति एवं उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में सरायगढ़ के प्रमुख, बौराहा एवं सरायगढ़ पंचायतों के मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी अच्युतानंद कुमार, अंचल अधिकारी, राजस्व पदाधिकारी तथा अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र