सीआईडी का फर्जी डीएसपी मनोज वर्मा निकला डाकपाल, एसएसपी ने किया खुलासा

 


भागलपुर, 20 अगस्त (हि.स.)। भागलपुर के सीनियर एसपी (एसएसपी) प्रमोद कुमार यादव ने सीआईडी का फर्जी डीएसपी मनोज शर्मा मामले का खुलासा करते हुए बताया गुरुवार को बताया कि बांका थाने में पूर्व में एक जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसे बाद में इशाकचक थाना ट्रांसफर किया गया।

इसके अलावा बाईपास थाने में भी एक मामला दर्ज हुआ है। आरोपी मनोज वर्मा खुद को सीआईडी का डीएसपी बताता है, लेकिन वह डीएसपी नहीं है। मैंने स्पेशल ब्रांच से भी इसका सत्यापन कराया है।

वह वास्तव में पटना में बिहार पुलिस के एक विभाग में कार्यरत है, जहां वह डाक पहुंचाने का काम करता है। एसएसपी ने आगे बताया कि पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन वह पटना और भागलपुर स्थित अपने घरों से फरार चल रहा है।

भागलपुर में उसके घर पर हुई छापेमारी के दौरान हथियार बरामद हुए हैं, जिन्हें लाइसेंसी बताया गया है। पुलिस अब इन हथियारों के लाइसेंस को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी द्वारा कुछ पीड़ितों के पैसे लौटाने की बात भी सामने आई है।

दरअसल, खुद को सीआईडी का डीएसपी बताने वाला यह व्यक्ति भागलपुर में दर्जन भर से अधिक लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर चुका है।

आरोपी बिहार कृषि कॉलेज, एनटीपीसी और पुलिस विभाग में पैरवी के नाम पर लोगों को अपना शिकार बनाता था। ठगी के शिकार लोगों में एक गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला भी शामिल हैं, जिन्होंने अन्य पीड़ितों के साथ मिलकर भागलपुर के इशाकचक और बाईपास थाने में मामला दर्ज कराया है।

पीड़ितों की तरफ से कानूनी पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी ने मानवता को ताक पर रखकर बीमार लोगों से भी मोटी रकम ठगी है।

उन्होंने भागलपुर के आईजी और सीनियर एसपी से अनुरोध किया है कि इस फर्जी अधिकारी के खिलाफ जल्द से जल्द कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए और सभी पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए। फिलहाल पुलिस की विशेष टीम आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर