बदलते मौसम में फसलों के लिए बड़ा खतरा बन रहे सूत्रकृमी, बीएयू में विशेषज्ञों ने की चर्चा
भागलपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले सूत्रकृमियों से जुड़ी समस्याओं और उनके आधुनिक प्रबंधन पर शनिवार को एक दिवसीय 'ब्रेन स्टार्मिंग सेशन' का आयोजन किया गया। अनुसंधान निदेशालय एवं कीट विज्ञान विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि और उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों के बढ़ते प्रकोप के प्रति वैज्ञानिकों और छात्रों को जागरूक करना था।समाचार पत्र के प्रारूप में तैयार की गई विस्तृत खबर नीचे दी गई है:फसलों में सूत्रकृमियों की समस्या और प्रबंधन पर BAU में मंथन, विशेषज्ञों ने दी आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह
भागलपुर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अनुसंधान निदेशालय एवं कीट विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को'फसलों में सूत्रकृमियों से जुड़ी समस्याएं एवं उनके नवोन्मुखी समेकित प्रबंधन' विषय पर एक दिवसीय ब्रेन स्टार्मिंग सेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर) की वैज्ञानिक डॉ. निशि केशरी ने अपने व्याख्यान में कृषि में सूत्रकृमियों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों द्वारा होने वाले आर्थिक नुकसान और उनके नवोन्मुखी समेकित प्रबंधन की तकनीकों को विस्तार से समझाया। शोध निदेशक विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने मौसम परिवर्तन के कारण बदलती पारिस्थितिकी में सूत्रकृमियों की व्यापक समस्याओं के प्रति आगाह किया। डॉ. सिंह ने छात्रों को पौध संरक्षण के क्षेत्र में नवीन कृषि स्वरोजगार से जुड़ने की सलाह दी और कहा कि इस तरह के आयोजनों से शोध कार्यों को नया बल मिलेगा।
निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार ने कृषि में नेमाटोड्स से जुड़ी विश्वव्यापी समस्याओं के बारे में चेताते हुए इसके निदान के लिए एक विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। बिहार कृषि महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रूबी रानी ने बागवानी फसलों में इसके बढ़ते प्रकोप पर चिंता जताई और वैज्ञानिकों से इसके त्वरित निदान खोजने का आह्वान किया।
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरण कुमारी ने फसलों में हो रहे नुकसान को लेकर विभाग द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं और प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम के सफल संचालन में आयोजन सचिव डॉ. अनुकरण साहू ने अतिथियों का स्वागत किया और सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. संजय कुमार शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रामानुज विश्वकर्मा द्वारा दिया गया। इस ज्ञानवर्धक सत्र में सह निदेशक शोध डॉ. चंदा कुशवाहा, पौधा रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. जे.एन. श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य और परास्नातक विद्यार्थियों समेत 80 से अधिक लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर