5 एकड़ 12 डिसमिल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
किशनगंज, 12 जुलाई (हि.स.)। जिले में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व मंत्री के गृह जिले में 5 एकड़ 12 डिसमिल सरकारी भूमि पर कब्जे के बावजूद प्रशासन एक माह बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा सका है।
अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) द्वारा जारी अतिक्रमण हटाने का आदेश भी अब तक धरातल पर लागू नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार, मामला किशनगंज प्रखंड की बेलवा पंचायत अंतर्गत मौजा बेलवा काशीपुर का है। अपर समाहर्ता, किशनगंज ने जमाबंदी रद्दीकरण वाद संख्या-11/2022-23 में पारित आदेश के तहत मौजा काशीपुर, थाना संख्या-04, खाता संख्या-174 एवं खेसरा संख्या-808 की जमाबंदी रद्द कर दी थी।
इसके बाद उक्त 5 एकड़ 12 डिसमिल भूमि सरकारी खाते में दर्ज कर दी गई। आरोप है कि भूमि सरकारी घोषित होने के बावजूद कुछ लोगों ने उस पर हल चलाकर चाय का बागान विकसित करना शुरू कर दिया। मामले की शिकायत व्हाट्सएप, सोशल मीडिया तथा लिखित आवेदन के माध्यम से प्रशासन को दी गई थी।
अभिलेखों के अनुसार, अंचल प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया और उनके विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज कराई। इसके बावजूद भूमि पर चाय बागान लगाने की गतिविधियां जारी रहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल प्रशासन ने 12 जून 2026 को अतिक्रमण हटाने के लिए संयुक्त आदेश जारी किया था।
आदेश के तहत दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी तथा 50 महिला और 50 पुरुष पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई थी। हालांकि निर्धारित तिथि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकी। एक माह बीत जाने के बाद भी आदेश फाइलों तक सीमित है और सरकारी भूमि पर कब्जा बरकरार है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमणकारी पहले से विकसित चाय बागान के समीप बची हुई सरकारी भूमि को भी बांस-बल्ली से घेरकर स्थायी कब्जे की तैयारी कर रहे हैं, जिससे और अधिक अतिक्रमण की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर स्थायी कब्जा हो सकता है।
इस संबंध में पूछे जाने पर अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार ने बताया कि सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए कल कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह अपने आदेश का पालन सुनिश्चित कर सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करा पाता है या नहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह